पंजाब 9 जनवरी (दैनिक खबरनामा)पंजाब में नीति से प्रगति तक का स्पष्ट संदेशमुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट द्वारा लिए गए ताज़ा फैसले यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि राज्य सरकार अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ज़मीनी स्तर पर प्रभाव डालने
वाली नीतियों को निर्णायक रूप से लागू करने के मूड में हैस्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी विकास, बुनियादी ढांचा और कर्मचारियों के हित—हर क्षेत्र में लिए गए निर्णय ‘प्रो-पीपल गवर्नेंस’ की दिशा में एक सशक्त कदम हैं।सबसे अहम फैसला लहरागागा में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना को लेकर है। 19 एकड़ से अधिक भूमि पर प्रस्तावित यह संस्थान न केवल मालवा क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा, बल्कि पंजाब को मेडिकल शिक्षा का केंद्र बनाने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो सकता है। 220 बेड और 50 एमबीबीएस सीटों से शुरुआत कर आठ वर्षों में 400 बेड और 100 सीटों तक विस्तार की योजना, राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने में सहायक होगी। साथ ही, फीस और प्रवेश प्रक्रिया पर सरकारी नियंत्रण यह सुनिश्चित करेगा कि शिक्षा व्यवसाय नहीं, सेवा बनी रहे।शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए देश की पहली प्राइवेट डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी पॉलिसी, 2026 को मंजूरी दी है। यह नीति न केवल समय की मांग है, बल्कि भविष्य की शिक्षा का रोडमैप भी है। आज जब लाखों युवा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से कौशल सीख रहे हैं, तब डिग्री और स्किल के बीच की खाई को पाटने की यह कोशिश दूरगामी परिणाम दे सकती है। डिजिटल यूनिवर्सिटीज़ के माध्यम से छात्र घर बैठे, नौकरी या पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई कर सकेंगे। यह पहल पंजाब को देश का डिजिटल हायर एजुकेशन हब बनाने की क्षमता रखती है।शहरी विकास और आम नागरिकों को राहत देने के लिए एमनेस्टी पॉलिसी 2025 का विस्तार एक व्यावहारिक और संवेदनशील निर्णय है। डिफॉल्टिंग प्लॉट अलॉटियों को 31 मार्च 2026 तक एक और अवसर देना यह दर्शाता है कि सरकार दंडात्मक रवैये की बजाय समाधान-आधारित दृष्टिकोण अपना रही है। इसी क्रम में GMADA की प्रॉपर्टी कीमतों का स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर युक्तिकरण, रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और वास्तविकता लाने का प्रयास है।बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर सतलुज नदी की डीसिल्टिंग को मंजूरी देना, लुधियाना–रोपड़ सड़क परियोजना जैसी अहम परियोजनाओं को गति देगा। तय दरों पर यह कार्य कराना न केवल समय और लागत दोनों की बचत करेगा,बल्कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी को भी रोकेगा।वहीं बाबा हीरा सिंह भट्टल संस्थान के कर्मचारियों को सरकारी विभागों में समायोजित करने का निर्णय यह दिखाता है कि सरकार सुधारों के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को भी प्राथमिकता दे रही है।कुल मिलाकर, ये फैसले पंजाब सरकार की उस सोच को दर्शाते हैं जिसमें विकास, सुधार और संवेदनशीलता—तीनों का संतुलन है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मूलभूत क्षेत्रों में निवेश से लेकर शहरी राहत और प्रशासनिक पारदर्शिता तक, कैबिनेट के ये निर्णय यह संदेश देते हैं कि पंजाब अब नीतियों से आगे बढ़कर परिणामों की राजनीति की ओर कदम बढ़ा रहा है।