कोलकाता 9 जनवरी (दैनिक खबरनामा) कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। चुनावी रणनीति संभालने वाली संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीधी दखलअंदाजी ने अब संविधान की धारा 356 यानी राष्ट्रपति शासन की बहस को हवा दे दी है।8 जनवरी 2026 को ED और इनकम टैक्स विभाग ने कोलकाता स्थित I-PAC के कार्यालय और संस्था के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। एजेंसियों का आरोप है कि संस्था से जुड़े कुछ लेन-देन हवाला नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।छापेमारी की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गईं और ED अधिकारियों से तीखी बहस हुई। आरोप है कि इस दौरान ममता बनर्जी ने एजेंसी की कार्रवाई में हस्तक्षेप किया, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री जब्त किए गए दस्तावेज और हार्ड डिस्क अपने साथ ले गईं।इस घटनाक्रम के बाद सियासत गरमा गई है। बीजेपी के साथ-साथ CPI(M) और कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी की मांग कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने संवैधानिक संस्थाओं के काम में बाधा डालकर कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार इस पूरे घटनाक्रम को संवैधानिक संकट मानती है, तो पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल राज्य और केंद्र के बीच टकराव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।
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