पंजाब 30 जनवरी 2026 (दैनिक खबरनामा) पंजाब के प्रख्यात विचारक, प्रशासक और सांस्कृतिक मनीषी डॉ. एम.एस. रंधावा की बहुआयामी विरासत को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। उनके पैतृक गांव बोडल स्थित पुश्तैनी घर को स्मारक संग्रहालय और सांस्कृतिक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है।इस महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी पहल की अगुवाई प्रसिद्ध विद्वान, कलाकार और चिंतक डॉ. सतिंदर सरताज कर रहे हैं। उनका मानना है कि पंजाब की नई पीढ़ी को उन महान व्यक्तित्वों से जोड़ना समय की आवश्यकता है, जिन्होंने राज्य की बौद्धिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना को आकार दिया, लेकिन जिनका योगदान इतिहास के हाशिये पर चला गया।डॉ. एम.एस. रंधावा के परिवार ने इस उद्देश्य के लिए उनके पुश्तैनी घर को संग्रहालय में परिवर्तित करने की सहमति देकर इस पहल को मजबूती प्रदान की है। हाल ही में डॉ. सतिंदर सरताज सहित रंधावा परिवार के सदस्य बोडल गांव स्थित पैतृक निवास पर पहुंचे, जहां इस परियोजना को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।डॉ. रंधावा ने कला, संस्कृति, कृषि, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी सोच ने पंजाबी अस्मिता और आधुनिक सांस्कृतिक दृष्टिकोण को नई दिशा दी। इन्हीं योगदानों को सहेजने और जनमानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह संग्रहालय स्थापित किया जाएगा।इस योजना को बोडल गांव के निवासियों का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। ग्रामीण इसे न केवल गांव बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय मानते हुए सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।प्रस्तावित स्मारक संग्रहालय में डॉ. रंधावा के जीवन, लेखन, विचारधारा और प्रभाव को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही यह स्थान सांस्कृतिक संवाद, विरासत संरक्षण, पर्यावरणीय जागरूकता और पंजाबी बौद्धिक परंपराओं से जुड़े कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों का केंद्र बनेगा।पहल से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि यह संग्रहालय केवल स्मृति स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्था होगी, जो अतीत की धरोहर को वर्तमान से जोड़ते हुए आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने का कार्य करेगी।
संग्रहालय की रूपरेखा, गतिविधियों और जनसहभागिता से संबंधित विस्तृत जानकारी आगामी महीनों में सार्वजनिक की जाएगी।