चंडीगढ़ 10 मार्च 2026( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली (ट्राइसिटी) में रिहायशी प्लॉट और फ्लैट की तेजी से बढ़ती कीमतों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि सरकारी हाउसिंग एजेंसियां अब अपने मूल उद्देश्य से भटककर मुनाफाखोरी में लग गई हैं, जिससे आम नागरिक और मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना बेहद मुश्किल हो गया है।जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने हरियाणा, पंजाब और यूटी चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे अदालत के समक्ष ऐसा प्रस्ताव पेश करें, जिससे सस्ती आवास योजना के मूल उद्देश्य को फिर से लागू किया जा सके। अदालत ने सुझाव दिया कि प्लॉट और फ्लैट के आवंटन के लिए लॉटरी जैसे वैकल्पिक तरीकों को अपनाया जाए, ताकि वेतनभोगी और मध्यम वर्गीय परिवारों को भी घर मिल सके।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA), ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा ट्राइसिटी में जिस कीमत पर प्लॉट और फ्लैट की नीलामी की जा रही है, वह पेशेवरों, वेतनभोगी वर्ग और कम आय वाले लोगों की पहुंच से बाहर है। पहले इन एजेंसियों के पास लॉटरी सहित कई योजनाएं होती थीं, जिनका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को घर उपलब्ध कराना था, लेकिन अब नीलामी के जरिए यह उद्देश्य पीछे छूट गया है।
खंडपीठ ने कहा कि सरकारी एजेंसियां आर्थिक रूप से मजबूत हैं और उनके पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं। इसके बावजूद वे सस्ती आवास सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय करोड़ों रुपये से शुरू होने वाली नीलामी कर रही हैं, जो मध्यम वर्ग के लिए निराशाजनक स्थिति है।अदालत ने यह भी कहा कि जीवन के अधिकार में आश्रय और सस्ती आवास सुविधा भी शामिल है। ऐसे में राज्यों की जिम्मेदारी है कि वे आम नागरिकों के लिए किफायती आवास सुनिश्चित करें।हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि पहले एक परिवार से केवल एक व्यक्ति को ही प्लॉट या फ्लैट का आवंटन मिल सकता था, लेकिन अब यह प्रतिबंध हटा दिया गया है। अदालत के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं, जहां एक ही व्यक्ति ने नीलामी में कई प्लॉट या फ्लैट हासिल कर लिए हैं।
मामले में अदालत की सहायता के लिए अधिवक्ता श्रीनाथ ए. खेमका को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है।