हिमाचल प्रदेश 18 मार्च( दैनिक खबरनामा ) हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान की गई बजट घोषणाओं पर जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार काफी धीमी रही है। कई योजनाएं ऐसी हैं, जिनका उद्घाटन तो हो चुका है, लेकिन उन पर काम शुरू तक नहीं हो पाया। हेलीपोर्ट, डे-बोर्डिंग स्कूल और खेल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं दो से तीन साल से अधर में लटकी हुई हैं।प्रदेश सरकार का कहना है कि केंद्र की बंदिशों और सीमित संसाधनों के बावजूद योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि हकीकत यह है कि वित्तीय दबाव, भूमि अधिग्रहण में दिक्कतें, वन स्वीकृतियों में देरी और एक साथ बड़ी संख्या में योजनाओं की घोषणा के कारण उनका समय पर क्रियान्वयन नहीं हो सका।
2023 से 2025 के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यटन, खेल और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा हुई, लेकिन इनमें से अधिकांश अब तक अधूरी हैं। पर्यटन और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए घोषित हेलीपोर्ट परियोजनाओं का भी यही हाल है। नाहन के धारक्यारी में हेलीपोर्ट का काम जारी है, जबकि कुल्लू-मनाली में यह वन स्वीकृति के कारण अटका हुआ है।ऊना के जनकौर में सर्वे पूरा होने के बावजूद प्रशासनिक मंजूरी लंबित है। बिलासपुर और हमीरपुर में निर्माण कार्य अधूरा है, वहीं चंबा के सुल्तानपुर हेलीपोर्ट का केवल 40 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है।खेल और शिक्षा क्षेत्र में भी कई योजनाएं ठप पड़ी हैं। रामपुर के दत्तनगर में खेल छात्रावास और इंडोर स्टेडियम उद्घाटन के बाद भी शुरू नहीं हो सके। कालाअंब में 220 केवी सब-स्टेशन की योजना वर्षों से लंबित है। नालागढ़ में मेडिकल डिवाइस पार्क और प्रस्तावित महिला छात्रावास का निर्माण भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है।हर साल नई घोषणाएं होने के बावजूद पुरानी योजनाओं का पूरा न होना सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।