दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 16 जुलाई: डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ बढ़ते साइबर फ्रॉड को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय क्षेत्र में डेटा की सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। आरबीआइ ने बैंकों, NBFC, सहकारी बैंकों और अन्य रेगुलेटेड संस्थाओं के लिए ‘डेटा गवर्नेंस के दिशा-निर्देश’ का मसौदा जारी किया है।
इस ड्राफ्ट का मकसद डिजिटल बैंकिंग के दौर में ग्राहकों की जानकारी को ज्यादा सटीक, सुरक्षित और निजी बनाना है। RBI का मानना है कि डेटा सिर्फ एक संपत्ति नहीं है, यह ग्राहक और संस्था के बीच भरोसे की नींव भी है।
ड्राफ्ट में क्या खास है
1. डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क जरूरी
हर वित्तीय संस्था को अपने आकार के हिसाब से एक पूरा DGF तैयार करना होगा। इसमें बोर्ड की निगरानी, नीतियां, कार्यप्रणाली और नियमित ऑडिट शामिल होंगे।
2. तीन अहम जिम्मेदारियां तय
– डेटा ओनर: डेटा की गुणवत्ता और जवाबदेही देखेगा
– डेटा स्टीवर्ड: रोजमर्रा के काम और नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा
– डेटा कस्टोडियन: तकनीकी सुरक्षा, एक्सेस और स्टोरेज संभालेगा
3. एक ही आधिकारिक स्रोत
खाता विवरण, KYC, लेनदेन जैसी हर जानकारी के लिए SSOT यानी Single Source of Truth बनाया जाएगा। इससे अलग-अलग सिस्टम में डेटा का मेल नहीं खाने की दिक्कत और गलतियां कम होंगी।
4. डेटा का पूरा जीवनचक्र
डेटा बनने से लेकर इस्तेमाल, शेयरिंग, स्टोरेज और अंत में डिलीट करने तक हर स्टेज पर नजर रखी जाएगी। साथ ही डेटा की गुणवत्ता, श्रेणी और उसकी उत्पत्ति यानी Lineage को भी दर्ज करना होगा।
5. थर्ड पार्टी पर कड़ी नजर
बाहरी कंपनियों के साथ डेटा साझा करने के लिए अब कड़े नियम लागू होंगे। इसके अलावा अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले DPDP एक्ट, 2023 का पालन भी अनिवार्य किया गया है।
आम ग्राहक को क्या फायदा
RBI के इस कदम का असर सीधे हर बैंक ग्राहक पर पड़ेगा।
– बेहतर सुरक्षा: नाम, पता, मोबाइल, बैंक डिटेल और लेनदेन का रिकॉर्ड ज्यादा सुरक्षित रहेगा। डेटा लीक और गलत इस्तेमाल का जोखिम घटेगा।
– कम गलतियां: एक ही सही स्रोत से डेटा आने पर लोन अप्रूवल, क्रेडिट कार्ड, स्टेटमेंट और KYC अपडेट में गड़बड़ी की संभावना कम होगी। सेवाएं तेज और भरोसेमंद बनेंगी।
– सहमति जरूरी: बिना आपकी अनुमति के आपका डेटा किसी के साथ साझा नहीं किया जा सकेगा। थर्ड पार्टी के साथ शेयरिंग भी तय नियमों के तहत ही होगी।
– मन की शांति: बेहतर नियंत्रण से अनधिकृत एक्सेस और धोखाधड़ी के मामले घटने की उम्मीद है।
RBI का कहना है कि डिजिटल फ्रॉड जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। ये नए दिशा-निर्देश पूरे वित्तीय सिस्टम को मजबूत करेंगे और लोगों को बिना डर के डिजिटल सेवाएं इस्तेमाल करने में मदद करेंगे।