नई दिल्ली 14 फरवरी 2026(दैनिक खबरनामा ) नई दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी से जुड़े कथित वीडियो विवाद मामले में दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने जालंधर की पुलिस कमिश्नर को विशेषाधिकार हनन और अवमानना के आरोपों को लेकर अंतिम अवसर देते हुए नोटिस जारी किया है।यह मामला उस कथित वीडियो से जुड़ा है, जिसमें आतिशी पर सिख गुरुओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। इसी आधार पर पंजाब पुलिस ने केस दर्ज किया था। दिल्ली विधानसभा सचिवालय के अनुसार, समिति ने इस मामले में पुलिस कमिश्नर से 12 फरवरी तक जवाब मांगा था, लेकिन निर्धारित समयसीमा तक कोई जवाब नहीं भेजा गया।नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि विशेषाधिकार मामलों में जवाब सीधे संबंधित अधिकारी द्वारा समिति को प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समिति द्वारा मांगी गई जानकारी या दस्तावेजों को देने में देरी अथवा इंकार को भी विशेषाधिकार हनन और अवमानना माना जा सकता है।विशेषाधिकार समिति की अध्यक्ष की पूर्व स्वीकृति के बाद जारी पत्र में अब पुलिस कमिश्नर को 20 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का अंतिम मौका दिया गया है। मामले में जवाब न आने पर समिति आगे की कार्रवाई कर सकती है।
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सीधी | 29 दिसंबर | अमित मिश्रा सीधी जिले के मझौली क्षेत्र अंतर्गत पांढ, ताला एवं मझौली धान खरीदी केंद्रों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जबकि जिला कलेक्टर सीधी द्वारा उपार्जन केंद्रों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के सख्त निर्देश दिए गए हैं और कई स्थानों पर कार्रवाई भी की जा चुकी है, इसके बावजूद कुछ प्रभारी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मझौली खरीदी केंद्र स्थित पांढ व ताला क्षेत्र का है, जहां उपार्जन केंद्र प्रभारी नियमों को ताक पर रखकर धान खरीदी कर रहे हैं। स्थानीय किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी को न तो किसी अधिकारी का डर है और न ही किसी कार्रवाई की परवाह। पूर्व में अधिकारियों द्वारा खरीदी केंद्र का निरीक्षण भी किया गया था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि निर्धारित 41 किलो की जगह 41 किलो 200 ग्राम तक धान भरवाया जा रहा है। इतना ही नहीं, नियमों के विपरीत धान की तौल और बोरा भराई का कार्य किसान स्वयं करने को मजबूर हैं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि अतिरिक्त धान भरवाने से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है, लेकिन मजबूरी में वे इस व्यवस्था को सहन कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि कलेक्टर के सख्त निर्देशों और पूर्व निरीक्षण के बावजूद आखिर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषी उपार्जन केंद्र प्रभारियों पर कब सख्त कार्रवाई करता है।
- Vishal
- December 29, 2025