दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 12 जुलाई: दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में प्रकृति का कहर देखने को मिला। चित्रगुल इलाके के नाला छोटीहाल में शनिवार शाम करीब 7 बजे बादल फटने के बाद अचानक आए सैलाब ने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा दी।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार इस आकस्मिक बाढ़ की चपेट में खेती की जमीन, सेब के बगीचे, धान की फसलें और कई आबादी वाले इलाके आ गए। पानी के तेज बहाव से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को आनन-फानन में घर खाली करने पड़े।
घटना की खबर मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। राहत और बचाव दल प्रभावित जगहों पर भेज दिए गए हैं। साथ ही नुकसान का जायजा लेने और जरूरी एहतियाती कदम उठाने का काम शुरू कर दिया गया है।
किसानों की आजीविका पर संकट
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाढ़ का पानी घरों में घुस गया। इससे धान के खेत और सेब के बाग पूरी तरह बर्बाद हो गए। गांव के मंजूर अहमद खान ने बताया कि इस आपदा ने खेती पर निर्भर परिवारों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि लगातार बारिश के बाद आया सैलाब सेब के बाग और धान की फसल को निगल गया। सरकार से उन्होंने मांग की कि किसानों को हुए नुकसान का जल्द आकलन कर मुआवजा दिया जाए।
मंजूर अहमद ने आगे बताया कि हालात इतने बिगड़ गए थे कि लोगों को जान बचाने के लिए घर छोड़ना पड़ा। पानी घरों के अलावा मस्जिद में भी भर गया था। चारों तरफ तबाही का नजारा था।
सड़क संपर्क टूटा, लोग रातभर दहशत में
एक अन्य ग्रामीण रईस अहमद ने बताया कि शनिवार शाम बादल फटते ही पहाड़ों से पानी का तेज बहाव आया और चित्रगुल अपर से गुजरने वाले नाले का रुख बदल गया। इसकी वजह से धान के खेत, बाग-बगीचे और मकानों को भारी क्षति पहुंची।
रईस अहमद के अनुसार स्थिति इतनी गंभीर थी कि कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। उन्होंने प्रशासन और सरकार से निष्पक्ष सर्वे कराकर प्रभावित लोगों को तुरंत राहत देने की मांग की।
उन्होंने यह भी बताया कि छतपाल की तरफ से आया पानी मुख्य सड़क को भी तोड़ गया, जिससे आवाजाही ठप हो गई। उन्होंने अनंतनाग के उपायुक्त से अपील की कि चित्रगुल, चकलिपोरा और ब्रिमर इलाकों में बागवानी और कृषि को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाए।
स्थानीय निवासी इश्फाक अहमद खान ने कहा कि इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत है। उन्होंने सरकार से खुद मौके पर आकर नुकसान का भौतिक सत्यापन करने और पीड़ित परिवारों को शीघ्र सहायता पहुंचाने की मांग की।
इश्फाक अहमद के मुताबिक बाढ़ से बाग-बगीचे, खेती की जमीन, मवेशी और सड़क संपर्क को बड़ा नुकसान हुआ है। डर के कारण रातभर लोग घर छोड़कर सड़कों और मस्जिदों में रात गुजारने को मजबूर हुए।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
जिला प्रशासन ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव टीमें तैनात कर दी गई हैं। नुकसान का आकलन जारी है और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने के साथ एहतियाती उपाय भी किए जा रहे हैं।