दैनिक ख़बरनामा 15 अप्रैल 2026 साहिबजादा अजीत सिंह नगर,
गन्ने की फसल में अधिक पैदावार और बेहतर शुगर रिकवरी के लिए उर्वरकों का संतुलित और समय पर उपयोग बेहद आवश्यक है। यह जानकारी देते हुए पंजाब के केन कमिश्नर डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि गन्ना एक लंबी अवधि की और अधिक पोषण लेने वाली फसल है, इसलिए इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की सही मात्रा देना जरूरी है।उन्होंने कहा कि नाइट्रोजन फसल की तेज वृद्धि, हरे-भरे पत्तों और अधिक शाखाओं के विकास में सहायक होती है, लेकिन यूरिया का अधिक उपयोग फसल में कीट व रोगों का प्रकोप बढ़ा सकता है और फसल गिरने का खतरा भी रहता है। इससे गन्ने का वजन और शुगर रिकवरी दोनों प्रभावित होते हैं।
केन कमिश्नर ने बताया कि बीज वाली फसल के लिए 130 किलो और रैटून (मूढ़ी) फसल के लिए 195 किलो यूरिया प्रति एकड़ उपयोग करने की सिफारिश है। यूरिया को एक साथ देने के बजाय अलग-अलग किस्तों में डालना चाहिए ताकि फसल को निरंतर पोषण मिलता रहे।उन्होंने आगे बताया कि फास्फोरस जड़ों के मजबूत विकास और शुरुआती वृद्धि के लिए जरूरी है। यदि मिट्टी में इसकी कमी हो तो बुवाई के समय 150 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट प्रति एकड़ डालना चाहिए। पोटाश गन्ने की मोटाई बढ़ाने, रस की गुणवत्ता सुधारने और फसल को कीट एवं बीमारियों से बचाने में मदद करता है।उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सिफारिशों के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करें, ताकि बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त की जा सके।