दैनिक खबरनामा | 14 अगस्त | वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ड्रोन और उनके कलपुर्जों के आयात पर 100 फीसदी तक नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। व्हाइट हाउस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा फैसला बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य विदेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं, खासकर चीन पर अमेरिका की निर्भरता कम करना है।
नई नीति के तहत 25 किलोग्राम से अधिक वजन वाले बड़े मानवरहित विमान प्रणालियों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाया जाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील तकनीकों से लैस ड्रोन सिस्टम भी इस दायरे में आएंगे। इनमें थर्मल इमेजर और डॉकिंग स्टेशन जैसी उन्नत क्षमताएं शामिल हैं। वहीं, छोटे ड्रोन पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि नए शुल्कों से देश में ड्रोन और उनके पुर्जों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता घटाकर अमेरिका में एक मजबूत ड्रोन विनिर्माण उद्योग विकसित करना चाहती है।
दुनिया के ड्रोन बाजार में चीन की मजबूत पकड़ है। कई अध्ययनों के अनुसार, 2006 में स्थापित चीनी कंपनी डीजीआई ने हाल के वर्षों में वैश्विक ड्रोन बाजार के दो-तिहाई से ज्यादा हिस्से पर कब्जा बनाए रखा है।
अमेरिका का यह कदम वाशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच सामने आया है। दोनों देशों के बीच उन्नत तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं। ज्यादातर नए टैरिफ 3 सितंबर से लागू होने की उम्मीद है।
इससे पहले पिछले सप्ताह चीन ने अमेरिका को ड्रोन निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। साथ ही छह अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया था। बीजिंग ने कहा था कि यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से जबरन श्रम और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर लगाए गए व्यापार प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया है।
चीन का यह कदम अमेरिका द्वारा चीन और 59 अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाए जाने के कुछ दिनों बाद आया था। अब ड्रोन और उनसे जुड़े पुर्जे भी दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक प्रतिबंधों से प्रभावित उत्पादों की सूची में शामिल हो गए हैं।
अमेरिका का कहना है कि नई टैरिफ नीति घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी और विदेशी ड्रोन तकनीक पर निर्भरता कम करेगी। हालांकि, इस फैसले से दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चल रहा तनाव और गहरा होने की संभावना है।