दैनिक खबरनामा । श्रीनगर, 17 जून :  जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी जनसंपर्क अभियान पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक एकजुटता के बजाय पार्टी के भीतर सक्रियता बढ़ाने का प्रयास बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी एनसी के इस अभियान या विरोध कार्यक्रमों में शामिल नहीं होगी।

मंगलवार को श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बुखारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए थी। उनका कहना था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का मौजूदा अभियान व्यापक राजनीतिक सहमति के बजाय पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कवायद अधिक प्रतीत होता है।

बुखारी ने कहा कि यदि राज्य के दर्जे की बहाली के मुद्दे पर सभी दल एक मंच पर आते, तो यह लक्ष्य कहीं अधिक तेजी से हासिल किया जा सकता था। उन्होंने कहा, “राजनीतिक एकता होती तो यह मसला छह महीने में सुलझ सकता था। अब इसमें छह साल भी लग सकते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा अवश्य मिलेगा।”

उन्होंने कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपना कार्यक्रम चलाने का अधिकार है, लेकिन अलग-अलग दलों द्वारा अलग-अलग स्वर में बात किए जाने से मुद्दा और जटिल हो जाता है। बुखारी ने कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकती, जिसमें अन्य राजनीतिक दलों को साथ लेने की मंशा ही न हो।

उन्होंने कहा, “नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला स्वयं स्पष्ट कर चुके हैं कि यह उनकी पार्टी का कार्यक्रम है और इसमें अन्य दलों को आमंत्रित नहीं किया जा रहा। ऐसे में हमारे शामिल होने का कोई औचित्य नहीं बनता।”

अपनी पार्टी की भूमिका का उल्लेख करते हुए बुखारी ने कहा कि उनकी पार्टी वर्ष 2020 से लगातार जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाती रही है। उन्होंने दावा किया कि उस समय कुछ राजनीतिक दल इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय इसे ‘दिल्ली का एजेंडा’ बताकर खारिज कर रहे थे, जबकि आज वही दल इसे अपना प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना चुके हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की जनता का मुद्दा है और उन्हें विश्वास है कि अंततः इस दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

इस दौरान बुखारी ने श्रीनगर हवाई अड्डे पर चल रहे विस्तार एवं बुनियादी ढांचा विकास कार्यों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि विकास परियोजनाओं के कारण पर्यटन प्रभावित होता है तो उसका उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।

उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि निर्माण कार्यों को मुख्य रूप से रात के समय संचालित किया जाए तथा दिन के समय हवाई अड्डे का सामान्य संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पर्यटकों, यात्रियों और स्थानीय कारोबारियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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