दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 21 जुलाई: पेरिस के बाद अब स्पेन में भी चंडीगढ़ से जुड़े दुर्लभ फर्नीचर की नीलामी पर ब्रेक लग गया है। प्रशासन के समय पर हस्तक्षेप से 22 जुलाई को स्पेन में होने वाली नीलामी टल गई है और अब इस सामान को भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
संस्कृति विभाग ने हाल में विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर अनुरोध किया था कि अमेरिका और स्पेन में प्रस्तावित नीलामियों को तुरंत रोका जाए और राजनयिक स्तर पर पहल कर इन वस्तुओं को देश लौटाया जाए।
अधिकारियों के मुताबिक, नीलामी सूची में शामिल फर्नीचर पर पुराने सरकारी स्टेंसिल के निशान मिले हैं। इससे संदेह है कि यह सामग्री चंडीगढ़ स्थित पूर्व पंजाब विधानसभा सदस्य ब्लॉक की सरकारी संपत्ति रही होगी। इस सिलसिले में प्रशासन ने पुलिस में मामला भी दर्ज कराया है।
प्रशासन का तर्क है कि यह फर्नीचर केवल लकड़ी का सामान नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की यूनेस्को विश्व धरोहर वास्तुकला का अभिन्न हिस्सा है। यह शहर की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। ऐसे में इसकी विदेश में बोली लगना न केवल चंडीगढ़ की ऐतिहासिक छवि को चोट पहुंचाता, बल्कि देश की धरोहर सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है।
जांच में सामने आया है कि यह सामान बिना जरूरी अनुमति के सरकारी परिसर से बाहर गया और बाद में विदेश पहुंच गया। इससे पहले 25 जून को फ्रांस की राजधानी पेरिस में भी ऐसी ही एक नीलामी होनी थी, जिसमें पीजीआई और पीयू से जुड़ा फर्नीचर शामिल था। प्रशासन के प्रयासों से वह नीलामी भी रद्द करवाई गई थी।
गौरतलब है कि बीते वर्षों में शहर का करोड़ों रुपये मूल्य का हेरिटेज फर्नीचर अलग-अलग मौकों पर विदेशों में नीलाम हो चुका है। हर बार नीलामी से पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के वकील और हेरिटेज संरक्षण कार्यकर्ता अजय जग्गा लिखित शिकायत देकर मामला उठाते रहे हैं। लेकिन इस वर्ष प्रशासन ने भी मोर्चा संभालते हुए नीलामी रुकवाने की पहल की।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्पेन वाली नीलामी रुकवाने के बाद अब सरकार इस फर्नीचर को वापस चंडीगढ़ लाने के लिए जरूरी कूटनीतिक और कानूनी कदम उठा रही है।