दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 27 जून : चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में होम-स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) सुविधाओं के संचालन को लेकर नई अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही रिहायशी क्षेत्रों में पर्यटकों के ठहरने के लिए होम-स्टे शुरू करने का रास्ता खुल गया है। हालांकि, यह सुविधा केवल उन आवासीय भवनों तक सीमित रहेगी जिनका क्षेत्रफल 500 वर्ग गज (एक कनाल) या उससे अधिक है। ऐसे में फ्लैट और छोटे मकानों के मालिक इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे।
प्रशासन के अनुसार यह निर्णय शहर में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा आगंतुकों को घरेलू वातावरण में आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है। यह अनुमति चंडीगढ़ एस्टेट नियम, 2007 के नियम 9(1) के तहत मुख्य प्रशासक द्वारा यूटी प्रशासक एवं पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की पूर्व स्वीकृति के बाद जारी की गई है।
नई व्यवस्था के तहत पर्यटन विभाग की बीएंडबी नीति में निर्धारित मानकों को पूरा करने वाली आवासीय संपत्तियों का उपयोग पर्यटकों के ठहराव के लिए किया जा सकेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, होटल उद्योग पर दबाव कम होगा और पात्र मकान मालिकों को अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। साथ ही पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव भी प्राप्त होगा।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि केवल 500 वर्ग गज या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले मकान ही इस योजना के लिए पात्र होंगे। संबंधित संपत्ति का चंडीगढ़ प्रशासन के पर्यटन विभाग के साथ बीएंडबी नीति के तहत पंजीकरण कराना आवश्यक होगा। आवेदन का अधिकार केवल संपत्ति के मालिक को होगा और उसे सभी आवश्यक अनुमति तथा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) भी प्राप्त करने होंगे।
विशेष शर्तें
न्यूनतम 500 वर्ग गज क्षेत्रफल वाला आवासीय भवन होना चाहिए।
पर्यटन विभाग की बीएंडबी नीति के अंतर्गत पंजीकरण अनिवार्य होगा।
आवेदन केवल संपत्ति मालिक ही कर सकेगा।
सभी जरूरी अनुमतियां और एनओसी लेना आवश्यक होगा।
नीति में निर्धारित सुरक्षा एवं संचालन संबंधी सभी नियमों का पालन करना होगा।
फ्लैट और छोटे मकानों को नहीं मिली अनुमति
प्रशासन के प्रारंभिक मसौदे में फ्लैटों और छोटे मकानों को भी योजना में शामिल करने पर विचार किया गया था, लेकिन अंतिम अधिसूचना में यह प्रावधान नहीं रखा गया। अब केवल बड़े स्वतंत्र मकानों को ही बीएंडबी संचालन की अनुमति दी जाएगी। इससे फ्लैट मालिकों और छोटे मकानों के स्वामियों की अतिरिक्त आय की संभावनाओं को झटका लगा है।
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में दिल्ली में एक बीएंडबी प्रतिष्ठान में आग लगने की घटना के बाद सुरक्षा मानकों को लेकर चिंताएं बढ़ी थीं। इसी कारण नीति के मसौदे में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। नई व्यवस्था के तहत किसी भी फ्लैट में बीएंडबी संचालन की अनुमति नहीं होगी और न ही भवन की मूल संरचना में कोई बदलाव किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि शहर की लगभग 100 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन क्राफ्ड ने भी फ्लैटों में होम-स्टे और बीएंडबी संचालन का विरोध किया था। संगठन का कहना था कि इससे रिहायशी इलाकों में सुरक्षा, पार्किंग और कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रशासन की अंतिम अधिसूचना में फ्लैटों को योजना से बाहर रखते हुए केवल बड़े स्वतंत्र मकानों को अनुमति दी गई है, जिससे स्थानीय निवासियों द्वारा जताई गई कई चिंताओं को ध्यान में रखा गया है।