दैनिक खबरनामा | 25जून, 2026 नई दिल्ली: ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को डराकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने व्यापक अभियान चलाया है। एजेंसी ने ऑपरेशन चक्र-VI के तहत देश के 16 राज्यों में एक साथ छापेमारी कर गिरोह के संचालन तंत्र को ध्वस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, साइबर ठगों ने सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटें तैयार कर लोगों का विश्वास हासिल किया। इसके बाद वे स्वयं को विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ितों को कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाते थे। नकली न्यायिक आदेशों और फर्जी जांच संबंधी दस्तावेजों का सहारा लेकर उनसे भारी रकम की उगाही की जाती थी।
सुप्रीम कोर्ट की शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत मिलने के बाद CBI ने औपचारिक मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि संबंधित फर्जी वेबसाइट का उपयोग देशभर में साइबर धोखाधड़ी के 200 से अधिक मामलों में किया गया था।
60 विशेष जांच दलों की संयुक्त कार्रवाई
गिरोह के खिलाफ अभियान को अंजाम देने के लिए CBI ने 60 विशेष टीमों का गठन किया। इन टीमों ने पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल और मणिपुर सहित 16 राज्यों में एक साथ दबिश दी।
चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान चेन्नई के बी. नरेश और कोलकाता के संजीब साहा को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों आरोपी शेल कंपनियों और म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी से अर्जित लगभग दो करोड़ रुपये की रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले नेटवर्क की आशंका
तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फोरेंसिक जांच के आधार पर CBI को इस साइबर गिरोह के देश के बाहर तक फैले संभावित नेटवर्क के संकेत मिले हैं। प्रारंभिक जांच से यह संभावना भी सामने आई है कि भारतीय नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिक भी इस गिरोह के निशाने पर रहे हो सकते हैं।
डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त
छापेमारी के दौरान एजेंसी ने बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विस्तृत फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा गया है। विदेशी पीड़ितों से जुड़े संभावित पहलुओं की जांच के मद्देनजर CBI संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ भी समन्वय स्थापित कर रही है।
CBI अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।