4 मार्च दैनिक खबरनामा पश्चिम एशिया में जारी ईरान–इजराइल तनाव का असर अब पंजाब के बागानों तक पहुंच गया है। पठानकोट की मशहूर ‘गुलाब’ खुशबू वाली लीची, जिसने पिछले वर्ष खाड़ी बाजारों में अपनी मिठास से पहचान बनाई थी, इस बार अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते निर्यात संकट में फंस गई है। वर्ष 2026 में दुबई और कतर के लिए लीची की खेप रवाना होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।वर्ष 2025 में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से पहली बार पठानकोट से 1 मीट्रिक टन लीची कतर की राजधानी दोहा और 0.5 मीट्रिक टन दुबई भेजी गई थी। बेहतर दाम मिलने से किसानों का उत्साह बढ़ा और कई बागवानों ने उत्पादन बढ़ाने के साथ निर्यात के लिए अतिरिक्त निवेश भी किया।मगर मौजूदा सैन्य तनाव के कारण एयर-कार्गो रूट प्रभावित हो गए हैं, जबकि समुद्री शिपमेंट की लागत भी बढ़ गई है। बीमा प्रीमियम और लॉजिस्टिक्स खर्च में भारी इजाफा हुआ है। ‘गुलाब’ लीची बेहद नाजुक फल है, जो लंबी ट्रांजिट अवधि में जल्दी खराब हो जाता है। निर्यातकों के अनुसार समय पर डिलीवरी और गुणवत्ता बनाए रखना फिलहाल जोखिम भरा हो गया है। खाड़ी देशों के आयातकों ने भी नए ऑर्डर रोक दिए हैं।इस समय मंडी में लीची का थोक भाव करीब 7000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि दिल्ली सहित अन्य शहरों में यह 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। निर्यात ठप रहने पर अतिरिक्त माल घरेलू बाजार में आएगा, जिससे दामों पर दबाव बढ़ सकता है।राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार 2023-24 में पंजाब में 71,490 मीट्रिक टन लीची का उत्पादन हुआ, जो देश के कुल उत्पादन का 12.39 प्रतिशत है। अब किसानों की उम्मीदें घरेलू बाजार और क्षेत्र में शांति बहाली पर टिकी हैं, ताकि अगले सीजन में खाड़ी का सफर दोबारा शुरू हो सके।
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