दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 3 अगस्त: केंद्र सरकार ने कहा है कि FSSAI ने कुछ शराब कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। वजह है नियमों का उल्लंघन और बोतल के लेबल पर ग्राहकों को गुमराह करने वाले दावे।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, जांच में सामने आया कि कई कंपनियां असली रम और व्हिस्की बनाने के बजाय एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल यानी ENA से बेस तैयार कर रही थीं। इसके बाद उसमें बाहर से लाए गए फ्लेवर मिलाकर रम-व्हिस्की जैसा स्वाद और सुगंध दी जा रही थी।
मंत्रालय ने बताया कि लैब जांच में कई सैंपल में आर्टिफिशियल और नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर पाए गए। इन फ्लेवर की वजह से पेय का असली स्वाद दब जाता है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता प्रभावित होती है और यह मौजूदा खाद्य मानकों के खिलाफ है।
पैकेजिंग को लेकर भी आपत्ति जताई गई। मंत्रालय का कहना है कि बोतल के सामने वाले हिस्से पर उत्पाद की सच्चाई साफ तौर पर नहीं लिखी गई थी, जिससे उपभोक्ता धोखे में आ सकते हैं।
उम्र के दावे पर भी सवाल उठे। सरकार ने ‘Old Monk XXX Rum’ के एक वेरिएंट पर लिखे “7-साल पुराना ब्लेंडेड” के दावे को गलत बताया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि Food Safety and Standards (Alcoholic Beverages) Regulations, 2018 के तहत ब्लेंडेड स्पिरिट की उम्र वही मानी जाएगी जो उस मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र की स्पिरिट की है।
इन अनियमितताओं के आधार पर FSSAI ने कई उत्पादन इकाइयों से बने माल की बिक्री रोकने के आदेश दिए हैं। जिनमें शामिल हैं:
– मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर की खोपोली इकाई
– यूनाइटेड स्पिरिट्स की बारामती फैसिलिटी
– मध्य प्रदेश में INBREW बेवरेजेज
– मध्य प्रदेश में एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रुअरीज
– मध्य प्रदेश स्थित यूनाइटेड स्पिरिट्स की एक अन्य इकाई
इन इकाइयों से निकले जिन ब्रांड्स पर असर पड़ा है उनमें Old Monk Rum, McDowell’s No.1 Rum, Bagpiper Deluxe Whisky, Old Cask Deluxe XXX Rum, Antiquity Blue Whisky और Royal Challenge Whisky के कुछ वेरिएंट शामिल हैं।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि गोवा की Mandexi Distilleries and Breweries में जांच और सैंपलिंग हुई है। वहीं महाराष्ट्र के छह अन्य निर्माताओं को नोटिस भेजे गए हैं।
रेगुलेटर ने साफ किया कि कॉफी या वैनिला जैसे फ्लेवरिंग एजेंट अगर कानूनन अनुमति प्राप्त हैं और उनका तकनीकी आधार है तो उन पर रोक नहीं है। दिक्कत तब आती है जब रम में रम जैसा या व्हिस्की में व्हिस्की जैसा फ्लेवर कृत्रिम रूप से मिलाकर असली उत्पाद की नकल की जाए।
सरकार ने जोर देकर कहा कि यह पूरा शराब उद्योग का मामला नहीं है। कई निर्माता तय मानकों के अनुसार ही अल्कोहलिक पेय तैयार कर रहे हैं और नियमों का पालन कर रहे हैं।