दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 5 अगस्त: आम आदमी पार्टी के विधायक इंदरबीर सिंह निज्जर ने गुरबाणी के प्रसारण के मुद्दे पर सरकार और एसजीपीसी से कई ठोस कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि गुरबाणी करोड़ों सिख श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी है, इसलिए इसका प्रसारण किसी व्यावसायिक सौदे का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।
विधायक निज्जर ने कहा कि गुरबाणी को सिख रीति-रिवाजों के अनुसार सभी टीवी चैनलों पर बिना किसी शुल्क और बिना किसी पक्षपात के दिखाने की व्यवस्था बनाई जाए। उनके अनुसार मौजूदा समय में प्रसारण को लेकर जो एकतरफा नियंत्रण की स्थिति बनी हुई है, उसे समाप्त किया जाना चाहिए, ताकि हर चैनल को बराबर मौका मिल सके। उनका तर्क है कि गुरबाणी का पवित्र संदेश ज्यादा से ज्यादा संगत तक पहुंचे और इसमें कोई व्यावसायिक रुकावट न आए।
एसजीपीसी के नुकसान और बकाया राशि का मुद्दा उठाया
इंदरबीर सिंह निज्जर ने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रसारण व्यवस्था की वजह से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने मांग की कि अगर एसजीपीसी को इससे क्षति पहुंची है तो उसकी भरपाई करवाई जाए। साथ ही उन्होंने लगभग 7.5 करोड़ रुपये की बकाया रकम को जल्द वसूलने पर भी जोर दिया।
उन्होंने एसजीपीसी को सुझाव दिया कि बार-बार होने वाले खर्चों से बचने के लिए संस्था अपने स्तर पर प्रसारण का ढांचा तैयार करे। निज्जर का मानना है कि अगर एसजीपीसी का अपना प्रसारण तंत्र होगा तो बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता घटेगी और भविष्य में अनावश्यक खर्च भी कम होंगे।
सिख न्यायिक आयोग और SGPC चुनाव की भी मांग
विधायक ने सिख न्यायिक आयोग में अध्यक्ष पद पर तुरंत नियुक्ति करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि आयोग के कामकाज को सुचारू रखने के लिए यह पद खाली नहीं रहना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव समय पर कराने की बात कही। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए नई प्रतिनिधि संस्था का गठन होना जरूरी है।
“गुरबाणी किसी के व्यावसायिक हित का विषय नहीं”
इंदरबीर सिंह निज्जर ने दोहराया कि गुरबाणी किसी एक संस्था, व्यक्ति या कारोबार से नहीं जुड़ी है, बल्कि यह पूरे सिख समुदाय की श्रद्धा का केंद्र है। इसलिए प्रसारण से जुड़े हर फैसले में सिख मर्यादा, पारदर्शिता और संगत की भावनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरबाणी का मूल उद्देश्य आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है, इसे कमाई का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।