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दैनिक खबरनामा 5 अगस्त नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र में पिछले एक सप्ताह से जारी राजनीतिक टकराव को समाप्त करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने विपक्ष से संवाद की पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से उनके संसद स्थित कक्ष में मुलाकात की। करीब 50 मिनट तक चली इस बैठक में रिजिजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलाने में सहयोग देने का आग्रह किया।

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने सरकार के सामने अपना पुराना रुख दोहराते हुए स्पष्ट किया कि जब तक गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर बयान नहीं देते, तब तक विपक्ष अपना विरोध जारी रखेगा और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चलने देगा।

परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस से समर्थन की अपील

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान किरेन रिजिजू ने आगामी परिसीमन बिल तथा महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगा। हालांकि राहुल गांधी ने कहा कि ‘चंदा चोरी’ और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामलों पर पहले गृह मंत्री अमित शाह को संसद में जवाब देना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि इन मुद्दों पर सरकार की प्रतिक्रिया मिलने तक विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं है। बैठक में प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। राहुल गांधी से चर्चा के बाद रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की और बाद में गृह मंत्री अमित शाह को वार्ता की पूरी जानकारी दी।

वेणुगोपाल का आरोप, सरकार विपक्ष को मनाने में जुटी

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस मुलाकात को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि किरेन रिजिजू प्रधानमंत्री का संदेश लेकर राहुल गांधी से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने दोहराया कि विपक्ष की प्राथमिक मांग ‘चंदा चोरी’ के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराना है। मानसून सत्र समाप्त होने में अब केवल छह दिन शेष हैं और अब तक बातचीत के बावजूद गतिरोध खत्म होता दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में सरकार के सामने या तो विपक्ष से सहमति बनाकर सत्र के अंतिम सप्ताह में परिसीमन विधेयक पेश करने का विकल्प है, या फिर 15 अगस्त के अवकाश के बाद मानसून सत्र को आगे बढ़ाने पर विचार करना पड़ सकता है।

परिसीमन विधेयक को लेकर बदले राजनीतिक हालात

गौरतलब है कि सरकार इससे पहले विस्तारित बजट सत्र के दौरान भी इस संविधान संशोधन विधेयक को पेश कर चुकी थी, लेकिन विपक्ष के तीव्र विरोध के कारण इसे पारित नहीं कराया जा सका। प्रस्तावित विधेयक में लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि तथा अगले लोकसभा चुनाव से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने का प्रावधान है। अप्रैल में विपक्ष ने यह कहते हुए इसका विरोध किया था कि इससे छोटे और दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।

पिछले पांच महीनों में राजनीतिक परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। डीएमके विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन से अलग हो चुकी है। वहीं टीएमसी के 20 और उद्धव ठाकरे गुट के 6 लोकसभा सांसद एनडीए में शामिल हो चुके हैं, जिससे सरकार दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच गई है। सूत्रों का दावा है कि यदि सरकार सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का लिखित आश्वासन देती है, तो डीएमके इस विधेयक का समर्थन कर सकती है। अब राजनीतिक नजरें मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह पर टिकी हैं, जहां परिसीमन बिल के साथ-साथ एफसीआरए (FCRA) बिल, जिसमें गैर-सरकारी संगठनों पर सख्ती के प्रावधान प्रस्तावित हैं, भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल हो सकता है।

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