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दैनिक खबरनामा | 15 जून, 2026 ब्यूरो चंडीगढ़: Punjab and Haryana High Court ने पटियाला के एक प्रेमी जोड़े द्वारा दायर सुरक्षा याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल कुछ दिनों तक साथ रहने से किसी संबंध को वैध और स्थापित लिव-इन रिलेशनशिप नहीं माना जा सकता।

याचिका में दोनों बालिग युवाओं ने दावा किया था कि वे एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, भविष्य में विवाह करना चाहते हैं और फिलहाल साथ रह रहे हैं। उनका आरोप था कि युवती का परिवार इस रिश्ते का विरोध कर रहा है तथा युवक को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जा रही है। इसी आधार पर उन्होंने पुलिस सुरक्षा की मांग की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी संबंध को वास्तविक लिव-इन रिलेशनशिप मानने के लिए उसका स्थायित्व और स्पष्ट आधार होना आवश्यक है। केवल कुछ समय तक साथ रहने को ऐसे संबंध का पर्याप्त प्रमाण नहीं माना जा सकता, विशेषकर तब जब दोनों पक्ष स्वयं भविष्य में विवाह करने की बात स्वीकार कर रहे हों।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, घर छोड़कर साथ रहने के मामलों में माता-पिता की सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान पर पड़ने वाले प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि भारतीय समाज में विवाह संस्था का विशेष महत्व है और इसे केवल व्यक्तिगत संबंध नहीं बल्कि सामाजिक एवं कानूनी मान्यता प्राप्त बंधन माना जाता है। अदालत ने पूर्व के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ परिस्थितियों में ऐसे मामलों को संरक्षण देने से सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने प्रेमी जोड़े की सुरक्षा संबंधी याचिका खारिज कर दी।

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