दैनिक खबरनामा 21 अप्रैल 2026 हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 151 सीबीएसई स्कूलों में गैर-शिक्षण स्टाफ की कमी जल्द दूर की जाएगी। निदेशालय प्रारंभिक शिक्षा ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजते हुए इन स्कूलों में आवश्यक पदों के अपग्रेडेशन और अतिरिक्त लिपिक स्टाफ की तैनाती का निर्णय लिया है। तय मानकों के अनुसार प्रत्येक स्कूल में एक अधीक्षक ग्रेड-1, एक अधीक्षक ग्रेड-2, एक सीनियर असिस्टेंट और चार क्लर्क/जेओए (आईटी) होने चाहिए। फिलहाल कई स्कूलों में यह व्यवस्था अधूरी है, जिसे पूरा करने के लिए अधीक्षक ग्रेड-1 का एक पद और तीन अतिरिक्त क्लर्क/जेओए (आईटी) तैनात किए जाएंगे।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधीक्षक ग्रेड-1 के नए पद सृजित नहीं होंगे, बल्कि बीईईओ कार्यालयों में कार्यरत सीनियर असिस्टेंट के पदों को अपग्रेड किया जाएगा। वहीं अतिरिक्त क्लर्क/जेओए (आईटी) की पूर्ति विभाग के भीतर रिक्त पदों, रैशनलाइजेशन और ट्रांसफर के माध्यम से की जाएगी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार बीईईओ कार्यालयों में 2105 स्वीकृत पदों में से बड़ी संख्या में पद खाली हैं, जबकि कुछ स्थानों पर जरूरत से अधिक स्टाफ भी मौजूद है। ऐसे में अतिरिक्त स्टाफ को स्कूलों में भेजने की योजना बनाई गई है।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षकों को गैर-शिक्षण कार्यों से मुक्त रखने पर जोर दिया गया है, ताकि वे पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकें। वर्तमान में स्टाफ की कमी के कारण शिक्षकों को प्रशासनिक कार्य भी संभालने पड़ रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रस्तावित 151 पदों के अपग्रेडेशन पर सालाना करीब 81.44 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा, जबकि क्लर्क पदों के युक्तिकरण से कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।वहीं दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के खाली पदों को लेकर मामला गरमा गया है। कर्मचारी संगठनों ने शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है। विश्वविद्यालय में 894 स्वीकृत पदों में से 496 पद खाली हैं, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों ने सरकार से जल्द भर्ती कर हालात सुधारने की मांग उठाई है।