दैनिक खबरनामा। शिमला, 9 जून: हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित राज्य एकल खिड़की निकासी एवं निगरानी प्राधिकरण की 32वीं बैठक में 42 औद्योगिक निवेश प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में 5,877.01 करोड़ रुपये का निवेश आने का मार्ग प्रशस्त होगा, जबकि 13,355 से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार निवेशकों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बना रही है, जिससे ‘व्यापार करने में सरलता’ को और मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने श्रम-आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य अधिकतम स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि राज्य की नई औद्योगिक नीति अगले दो महीनों के भीतर लागू कर दी जाएगी, जिससे हिमाचल प्रदेश निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा में पड़ोसी राज्यों के मुकाबले और मजबूत स्थिति में पहुंचेगा।
स्वीकृत परियोजनाओं में औषधि, स्वचालित वाहन, वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, प्लास्टिक, इस्पात और सौंदर्य प्रसाधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश का औद्योगिक ढांचा अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर विविधता की ओर तेजी से अग्रसर है।
उद्योग मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश की निवेश परिवर्तन दर 57 प्रतिशत रही है, जो राष्ट्रीय औसत 32 से 35 प्रतिशत की तुलना में काफी बेहतर है। यह उपलब्धि प्रदेश में निवेशकों के बढ़ते विश्वास और सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों को दर्शाती है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) आर.डी. नजीम ने कहा कि एकल खिड़की प्रणाली निवेशकों को त्वरित और सरल मंजूरी उपलब्ध कराने में प्रभावी साबित हो रही है। सरकार का प्रयास है कि सभी औद्योगिक अनुमतियां एकीकृत और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से समय पर उपलब्ध हों, ताकि निवेश परियोजनाएं तेजी से धरातल पर उतर सकें।
प्रदेश सरकार के इस फैसले को हिमाचल की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि स्वीकृत परियोजनाएं निर्धारित समय में क्रियान्वित होती हैं, तो राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकती है।