दैनिक खबरनामा 30 मार्च 2026 अक्सर लोग थकान, पेट दर्द या बदन दर्द जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन पीजीआई की एक नई रिसर्च ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। विशेषज्ञों के अनुसार खून में हल्का बढ़ा कैल्शियम भी एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी का संकेत हो सकता है।दिसंबर 2025 में जर्नल ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म (JEM) में प्रकाशित केस स्टडी में पीजीआई के प्रो. संजय भड़ाडा और उनकी टीम ने एक अहम मामला साझा किया। यह स्टडी 25 वर्षीय युवक पर आधारित है, जिसे लंबे समय से शरीर में हल्का दर्द, पेट फूलना, कब्ज और दस्त जैसी समस्याएं थीं।शुरुआत में मरीज को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम माना गया, लेकिन जांच में खून में कैल्शियम लगातार बढ़ा मिला। आगे की जांच में पैराथायरॉइड हार्मोन सामान्य से अधिक पाया गया, जबकि विटामिन-डी सामान्य था और स्कैन में कोई गांठ नहीं दिखी।निर्णायक सुराग 24 घंटे की यूरिन जांच से मिला, जिसमें कैल्शियम का स्तर बेहद कम पाया गया। इसके बाद डॉक्टरों को फैमिलियल हाइपोकैल्सियूरिक हाइपरकैल्सीमिया (FHH) का संदेह हुआ। जेनेटिक टेस्ट में CASR जीन में बदलाव की पुष्टि हुई, जिससे साफ हो गया कि मरीज FHH टाइप-1 से पीड़ित है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी को अक्सर प्राइमरी हाइपरपैराथायरायडिज्म समझ लिया जाता है, जिसमें सर्जरी तक करनी पड़ सकती है, जबकि FHH में आमतौर पर ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती।डॉक्टरों ने मरीज को दवाइयों से लक्षण नियंत्रित करने की सलाह दी और परिवार के अन्य सदस्यों की जांच कराने को कहा, क्योंकि यह बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी दिखने वाली मेडिकल रिपोर्ट भी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। सही समय पर सटीक जांच न केवल मरीज को गलत इलाज से बचाती है, बल्कि पूरे परिवार को जागरूक करने में भी मददगार साबित होती है।