दैनिक खबरनामा 2 मई 2026 हरियाणा में बीमार पड़ना आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने पर मरीजों को औसतन 10,987 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत 6,631 रुपये से करीब 66 फीसदी अधिक है। यानी सरकारी सुविधाओं के बावजूद इलाज पूरी तरह सस्ता नहीं हो पा रहा।रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में सरकारी अस्पतालों में इलाज का खर्च राष्ट्रीय स्तर से औसतन 4,356 रुपये ज्यादा है। वहीं निजी अस्पतालों में इलाज का औसत खर्च 42,359 रुपये है, जो देश के औसत 50,508 रुपये से कम जरूर है, लेकिन आम परिवार के लिए अब भी भारी है।विशेषज्ञों का कहना है कि दवाइयों, जांचों और अन्य सेवाओं पर अतिरिक्त खर्च इसकी बड़ी वजह है। कई बार सरकारी अस्पतालों में दवाइयां और सर्जिकल सामान उपलब्ध नहीं होते, जिससे मरीजों को इन्हें बाहर से खरीदना पड़ता है।चेरिटेबल अस्पतालों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जहां हरियाणा में औसत खर्च 16,945 रुपये है, जबकि राष्ट्रीय औसत 39,530 रुपये है। हालांकि कुल मिलाकर एक बार अस्पताल में भर्ती होने पर राज्य में औसत खर्च 33,713 रुपये तक पहुंच जाता है।आउटडोर इलाज (बिना भर्ती) भी महंगा साबित हो रहा है। गांव में औसतन 1,361 रुपये और शहर में 1,464 रुपये खर्च आता है, जो राष्ट्रीय औसत से करीब 63 फीसदी ज्यादा है।विशेषज्ञों के मुताबिक, भीड़, जांच में देरी और बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने से भी खर्च बढ़ता है। ऐसे में जरूरत है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाया जाए, ताकि आम लोगों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम हो सके।
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