दैनिक खबरनामा । श्रीनगर, 2 जुलाई: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को साफ किया कि जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द होने वाला है और इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। उन्होंने प्रदेश की कमजोर आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर वित्तीय जरूरतों के लिए पूरी तरह केंद्र सरकार पर निर्भर है। लंबे समय से चल रही कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं पर मुख्यमंत्री ने खुद विराम लगाया है। उमर अब्दुल्ला सरकार बनने के बाद यह मंत्रिमंडल में पहला बड़ा बदलाव होगा।
माना जा रहा है कि इस विस्तार से न सिर्फ प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि राजनीतिक समीकरण भी साधे जाएंगे। मौजूदा समय में मंत्रिपरिषद में छह सदस्य शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार कुल नौ मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए तीन नए मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने की संभावना है।
डाचीगाम नेशनल पार्क में हुई थी अहम बैठक
उमर अब्दुल्ला ने बताया कि कैबिनेट में बदलाव और फेरबदल की प्रक्रिया दिल्ली में होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले या उसके कुछ दिन बाद पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में कश्मीर के डाचीगाम नेशनल पार्क में हुई बैठक के बाद यह जरूरत महसूस हुई कि सरकार के काम को ज्यादा असरदार बनाने के लिए मंत्रिपरिषद में बदलाव जरूरी है।
हालांकि उन्होंने किसी मौजूदा मंत्री को हटाने की बात नहीं कही। सूत्रों के अनुसार, विस्तार के बाद कई मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं। डाचीगाम में हुई पार्टी बैठक में सत्तारूढ़ दल के कुछ विधायकों ने मंत्रियों के फंड आवंटन और कामकाज के तरीके पर आपत्ति जताई थी।
वित्तीय स्थिति पर जताई चिंता
जनकल्याण योजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि वह अपने कर्मचारियों का वेतन खुद वहन कर सके। केंद्र पर निर्भरता बनी हुई है। उन्होंने कहा, “हमारे सभी राजस्व स्रोत मिलाकर भी वेतन और पेंशन जैसी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर पाते।”
दूसरे राज्यों से तुलना करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कई राज्य बड़ी योजनाएं शुरू करके सीधे लाभार्थियों के खाते में पैसा भेज रहे हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर की वित्तीय क्षमता सीमित है। उन्होंने कहा, “जब मैं दूसरे राज्यों को देखता हूं तो सोचता हूं, काश हमारे पास भी ऐसी आर्थिक ताकत होती।”