दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 9 जुलाई: जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। पार्टी ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरने का ऐलान किया है और इसके लिए देशभर के विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक प्रतिनिधियों को चिट्ठी भेजी है। लेकिन इस मुहिम में पार्टी के अपने ही सांसद आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी को जगह नहीं मिली है, जिससे सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नाम से भेजे गए तीन पन्नों के पत्र में सभी दलों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की गई है। पत्र मिलने की पुष्टि पीडीपी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी, जेल में बंद सांसद इंजीनियर राशिद की अवामी इत्तेहाद पार्टी, मीरवाइज उमर फारूक और ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने की है। हालांकि इनमें से किसी ने भी अब तक हामी या इनकार की स्थिति साफ नहीं की है।
इंडिया गठबंधन के कई बड़े चेहरों को भी न्योता भेजा गया है। इस सूची में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, आप संयोजक अरविंद केजरीवाल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शामिल हैं।
डॉ. अब्दुल्ला ने पत्र में लिखा है कि यह कोई नई मांग नहीं है। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य के पुनर्गठन के समय संसद में यह वादा किया गया था कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा। 2024 में यहां चुनी हुई सरकार बनने के बाद भी वह वादा पूरा नहीं हुआ। उनके अनुसार यह जनता के जनादेश और संघीय ढांचे दोनों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल कराना संविधान, लोकतंत्र और संघवाद की रक्षा से जुड़ा सवाल है।
इस बीच पार्टी के बागी सांसद आगा रूहुल्ला मेहदी ने न्योते की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और अपनी पार्टी को बुलाना उचित नहीं है क्योंकि चुनाव के दौरान इन दलों ने राज्य के दर्जे पर केंद्र के रुख का समर्थन किया था। रूहुल्ला के मुताबिक एनसी की लड़ाई सिर्फ स्टेटहुड तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, इसमें अनुच्छेद 370 की बहाली भी शामिल होनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अल्ताफ बुखारी ने भी धरने में शामिल न होने का ऐलान कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब हमने राज्य का दर्जा मुद्दा उठाया था तब एनसी हमें दिल्ली का एजेंट बताती थी। अब वही उसी मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। बुखारी ने कहा, “स्टेटहुड मुझे यहां मक्का मार्केट में तो नहीं दिख रही। अगर जंतर-मंतर से लेकर आते हैं तो लखनपुर में स्वागत करेंगे।”
एनसी के इस कदम पर पीडीपी और कांग्रेस समेत अन्य दलों की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
डॉ. अब्दुल्ला ने पत्र के अंत में अपील की है कि सभी राजनीतिक दल और नागरिक एकजुट होकर यह संदेश दें कि जम्मू-कश्मीर के लोग संसद में किए गए वादे को भूलने नहीं देंगे।