चंडीगढ़ 11 मार्च 2026 (जगदीश कुमार) चंडीगढ़ रेजिडेंट्स एसोसिएशंस वेलफेयर फेडरेशन (CRAWFED) के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक से मुलाकात कर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) के ड्वेलिंग यूनिट्स में नीड-बेस्ड चेंजेज रेगुलराइजेशन पॉलिसी से जुड़े कई अहम मुद्दों को उठाया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व क्राफेड के चेयरमैन हितेश पुरी और जनरल सेक्रेटरी रजत मल्होत्रा ने किया।प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा प्रस्तावित नीड-बेस्ड चेंजेज रेगुलराइजेशन पॉलिसी लाने की पहल का स्वागत करते हुए प्रशासक का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से शहर के विभिन्न सेक्टरों में हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में रहने वाले हजारों परिवारों को राहत की उम्मीद जगी है।
हालांकि क्राफेड ने इस नीति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर भी ध्यान दिलाया। प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2023 की नीति, जिसे अब प्रस्तावित 2026 की नीति में फिर से शामिल किया जा रहा है, उसमें वर्ष 2010 के बाद चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी किए गए कई कार्यालय आदेशों और नोटिफिकेशनों को शामिल नहीं किया गया है। इन आदेशों के तहत निवासियों को अपने ड्वेलिंग यूनिट्स में जरूरत के अनुसार बदलाव करने की अनुमति दी गई थी।क्राफेड के अनुसार, चंडीगढ़ के विभिन्न सेक्टरों में सीएचबी फ्लैटों में रहने वाले करीब 60 हजार परिवारों ने इन आदेशों के आधार पर अपने प्लॉट एरिया और स्टोरी लाइन के भीतर बदलाव किए हैं। लेकिन प्रस्तावित नीति में यह उल्लेख किया गया है कि यह पहले जारी सभी आदेशों और नोटिफिकेशनों को निरस्त (Supersede) करती है। इससे ऐसे निवासी, जिन्होंने बोर्ड की अनुमति के आधार पर बदलाव किए थे, तकनीकी रूप से उल्लंघनकर्ता बन सकते हैं।प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस स्थिति से हजारों परिवारों में चिंता का माहौल है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ऐसे मामलों में ड्वेलिंग यूनिट्स को रद्द करने के लिए शो-कॉज नोटिस जारी कर सकता है और भारी डेमोलिशन या पेनल्टी चार्ज भी लगाए जा सकते हैं।क्राफेड ने प्रशासक से मांग की कि 2010 के बाद सीएचबी द्वारा जारी सभी आदेशों और नोटिफिकेशनों को प्रस्तावित रेगुलराइजेशन नीति में शामिल किया जाए, ताकि निवासियों को राहत मिल सके। इसके साथ ही संगठन ने वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम लाने का सुझाव दिया, जिसके तहत प्लॉट एरिया और स्टोरी लाइन के भीतर किए गए ऐसे निर्माण, जो नई नीति में शामिल नहीं हैं, उन्हें मामूली शुल्क लेकर नियमित किया जा सके।इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने सीएचबी के स्वतंत्र मकानों में भी ऊपरी मंजिलों पर निर्माण की अनुमति देने की मांग की, जैसा कि चंडीगढ़ में समान श्रेणी के मारला मकानों में पहले से ही अनुमत है।क्राफेड ने यह भी मांग रखी कि मृतक अलॉटियों के कानूनी वारिसों को वसीयत के आधार पर ड्वेलिंग यूनिट का ट्रांसफर बिना किसी कथित उल्लंघन से जोड़कर किया जाए। साथ ही सीएचबी संपत्तियों की बिक्री और ट्रांसफर की प्रक्रिया को छोटे-मोटे निर्माण उल्लंघनों से अलग करते हुए पहले की तरह सरल और सुगम बनाया जाए।यूटी प्रशासक ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि क्राफेड द्वारा उठाई गई चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।क्राफेड ने उम्मीद जताई कि जल्द ही एक न्यायसंगत और व्यापक नीति लागू की जाएगी, जिससे चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में रहने वाले हजारों परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत मिल सकेगी।

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