जिला अदालत ने 2017-18 की बढ़ी हुई फीस को बताया नियमों के विपरीत, 8 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी पर लगाई रोक
दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 30 मई : चंडीगढ़ के सेक्टर-47 स्थित माउंट कार्मल स्कूल द्वारा वर्ष 2017-18 में लागू की गई फीस वृद्धि को जिला अदालत ने नियमों के अनुरूप नहीं माना है। अदालत के फैसले से 349 अभिभावकों को राहत मिली है, जिन्होंने स्कूल की फीस बढ़ोतरी को चुनौती दी थी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निजी स्कूल निर्धारित सीमा से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकते। न्यायालय के अनुसार संबंधित शैक्षणिक सत्र में स्कूल अधिकतम 8 प्रतिशत तक ही फीस में वृद्धि कर सकता था। इसके अलावा फीस विवाद के आधार पर किसी छात्र के प्रवेश या पढ़ाई में बाधा नहीं डाली जा सकती।
मामले की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी, जब स्कूल प्रशासन ने नए सत्र के लिए फीस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की घोषणा की। अभिभावकों का आरोप था कि ट्यूशन फीस में 70 से 80 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी गई, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया।
अभिभावकों के अनुसार पहले जहां मासिक फीस लगभग 2700 रुपये थी, वहीं इसे बढ़ाकर करीब 4800 से 4975 रुपये तक कर दिया गया। उनका कहना था कि इतनी बड़ी वृद्धि से पहले न तो उनकी राय ली गई और न ही कोई ठोस औचित्य प्रस्तुत किया गया।
फीस बढ़ोतरी के विरोध में अभिभावकों ने पहले स्कूल प्रबंधन से बातचीत की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद फरवरी 2017 में अभिभावकों ने एक संगठन बनाकर प्रशासन और शिक्षा संबंधी अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। जब वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो मामला अदालत पहुंचा।
सुनवाई के दौरान स्कूल प्रबंधन ने पक्ष रखा कि वह एक निजी गैर-अनुदानित शिक्षण संस्थान है और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं तथा आधारभूत ढांचे के विकास के लिए फीस निर्धारण का अधिकार रखता है। स्कूल ने यह भी कहा कि फीस में बदलाव की जानकारी पहले से अभिभावकों को दी जाती रही है।
वहीं अभिभावकों ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि उस समय लागू नीतियों के अनुसार निजी स्कूलों को एक वर्ष में 8 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद फीस वृद्धि को अवैध करार देते हुए अभिभावकों के पक्ष में आंशिक फैसला सुनाया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभिभावक केवल स्वीकृत सीमा तक बढ़ाई गई फीस जमा करने के लिए बाध्य होंगे और अतिरिक्त राशि की मांग नियमों के अनुरूप नहीं मानी जाएगी।