दैनिक खबरनामा 2 अप्रैल 2026 लड़कियों की खरीद-फरोख्त जैसी अमानवीय कुप्रथा ‘नाता प्रथा’ एक बार फिर चर्चा में है। इस बीच केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को दी गई कार्रवाई रिपोर्ट को संशोधित रूप में सार्वजनिक करे।
सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने अपने आदेश में कहा कि मंत्रालय आरटीआई आवेदन पर दोबारा विचार करे और रिपोर्ट उपलब्ध कराए, हालांकि इसमें गोपनीय हिस्सों को हटाया जा सकता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ताओं और उनके परिवारों की निजी जानकारी आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत साझा नहीं की जा सकती।आरटीआई आवेदन में मंत्रालय, एनएचआरसी और राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात सरकारों के बीच हुए पत्राचार और कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की गई थी। आयोग ने माना कि कार्रवाई रिपोर्ट जनहित से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे साझा किया जाना जरूरी है।गौरतलब है किएनएचआरसी ने 6 जून 2024 को ‘नाता प्रथा’ को सामाजिक बुराई करार देते हुए चिंता जताई थी। आयोग के मुताबिक, इस प्रथा के तहत कुछ समुदायों में लड़कियों को शादी के नाम पर स्टांप पेपर या अनौपचारिक समझौतों के जरिए बेचा जाता है, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।एनएचआरसी ने इसे ‘अनैतिक’ और ‘अमानवीय’ बताते हुए खत्म करने की मांग की थी और संबंधित राज्यों व मंत्रालय को नोटिस जारी कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी।एक मामले में राजस्थान में एक नाबालिग लड़की को उसके पिता ने ढाई लाख रुपये में ‘नाता प्रथा’ के तहत बेच दिया। पहले 60 हजार रुपये दिए गए, लेकिन बाकी रकम न मिलने पर पिता लड़की को वापस ले आया और उसका ‘नाता’ दूसरी जगह 32 हजार रुपये में तय कर दिया।