दैनिक खबरनामा ब्यूरो। लंदन, 13 जून ; न्यूजीलैंड के दिग्गज बल्लेबाज केन विलियमसन ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही 16 वर्षों तक चले उनके शानदार क्रिकेट करियर का समापन हो गया। विलियमसन ने अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल कीं और वर्ष 2021 में न्यूजीलैंड को पहली विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब दिलाने वाले कप्तान बने।
विलियमसन के संन्यास के साथ ही आधुनिक क्रिकेट के प्रसिद्ध “फैब फोर” युग के समाप्त होने के संकेत भी मिलने लगे हैं। इस समूह में भारत के विराट कोहली, इंग्लैंड के जो रूट, ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ और केन विलियमसन शामिल रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार विलियमसन न्यूजीलैंड के सबसे सफल रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में विदा ले रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 19 हजार से अधिक रन बनाए और सभी प्रारूपों में टीम के सबसे सफल दौर में बल्लेबाजी की धुरी बने रहे।
अगस्त में 36 वर्ष के होने जा रहे विलियमसन ने इंग्लैंड के खिलाफ चल रही श्रृंखला के बीच यह फैसला लिया। पिछले सप्ताह खेले गए पहले टेस्ट मैच में वह केवल शून्य और 18 रन ही बना सके थे।
विलियमसन ने कहा, “मुझे लगता है कि यह सही समय है। मैंने इस टीम को अपना सब कुछ दिया है और बदले में इस टीम ने मुझे उससे कहीं अधिक दिया है।”
उन्होंने आगे कहा, “जब मैं ड्रेसिंग रूम में मौजूद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों और टीम के भविष्य की यात्रा को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि अब मेरे लिए पीछे हटने का सही समय आ गया है। मैं इस फैसले को लेकर अच्छा महसूस कर रहा हूं।”
पूर्व कप्तान विलियमसन ने 110 टेस्ट मैचों में 9,515 रन बनाए, जिनमें 33 शतक शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने 175 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और 93 ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले।
वर्ष 2024 से वह केंद्रीय अनुबंध का हिस्सा नहीं थे, जिससे उन्हें राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारियों के बीच फ्रेंचाइजी क्रिकेट खेलने की स्वतंत्रता मिली हुई थी।
लगातार अपनी क्षमता से बढ़कर प्रदर्शन करने वाली टीम का नेतृत्व करते हुए उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि वर्ष 2021 में आई, जब उन्होंने न्यूजीलैंड को भारत के खिलाफ पहली विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जीत दिलाई। उनकी कप्तानी में न्यूजीलैंड ने 40 टेस्ट मैचों में से 22 में जीत हासिल की।
हालांकि, विलियमसन की विरासत केवल उनकी जीत से नहीं, बल्कि हार के समय उनके व्यवहार से भी तय होती है।
विशेष रूप से 2019 क्रिकेट विश्व कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उनकी प्रतिक्रिया की दुनिया भर में सराहना हुई थी। वह मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ था और उसके बाद खेला गया सुपर ओवर भी टाई रहा। इसके बाद उस समय लागू “बाउंड्री गणना नियम” के आधार पर इंग्लैंड को विजेता घोषित किया गया था। बाद में इस नियम को समाप्त कर दिया गया। हार के बावजूद विलियमसन ने किसी अधिकारी या नियम को दोष नहीं दिया और खेल भावना की मिसाल पेश की।
वर्ष 2010 में भारत के खिलाफ अपने टेस्ट पदार्पण के बाद से विलियमसन न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी के सबसे भरोसेमंद स्तंभ रहे। उन्होंने दुनिया भर में मजबूत गेंदबाजी आक्रमणों का सफलतापूर्वक सामना किया।
उनके संन्यास से न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी में एक बड़ा खालीपन पैदा होगा, जिसे भरना टीम के लिए आसान नहीं होगा। साथ ही यह आधुनिक युग की सबसे प्रभावशाली बल्लेबाजी पीढ़ी के बदलाव की शुरुआत का संकेत भी है।
उनके समकालीन खिलाड़ियों में भारत के विराट कोहली अब केवल एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सक्रिय हैं, जबकि इंग्लैंड के जो रूट और ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ भी अपने करियर के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं।
न्यूजीलैंड के मुख्य कोच रॉब वॉल्टर ने कहा, “जिस किसी को भी केन के साथ काम करने का अवसर मिला है, वह जानता है कि वह कितने विशेष खिलाड़ी और इंसान हैं। उनके आंकड़े और बल्लेबाजी कौशल स्वयं उनकी महानता को दर्शाते हैं, लेकिन ब्लैक कैप्स और विश्व क्रिकेट के लिए उनका योगदान ही उनकी सबसे बड़ी विरासत रहेगा।”