दैनिक खबरनामा | 7 अगस्त | नई दिल्ली: पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राज्य की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद पंजाब में एक बार फिर अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच पुराने गठबंधन की संभावित वापसी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
संसद भवन में हुई पीएम मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल शुक्रवार सुबह विशेष रूप से दिल्ली पहुंचे। इसके बाद उन्होंने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के एजेंडे को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
हालांकि, चुनाव से कुछ महीने पहले हुई इस मुलाकात को पंजाब की राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि बैठक में पंजाब से जुड़े राजनीतिक मुद्दों और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा हुई हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुराने NDA सहयोगी रहे हैं अकाली दल और BJP
शिरोमणि अकाली दल और BJP लंबे समय तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रमुख सहयोगियों में शामिल रहे हैं। दोनों दलों के बीच पंजाब में लंबे समय तक चुनावी गठबंधन रहा, लेकिन बाद में राजनीतिक मतभेदों के चलते यह साथ टूट गया था।
अब विधानसभा चुनाव से करीब चार महीने पहले सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात ने पुराने राजनीतिक समीकरणों की संभावित वापसी की चर्चा को फिर से हवा दे दी है।
क्या दोबारा बनेगा चुनावी गठबंधन?
फिलहाल अकाली दल और BJP के बीच किसी नए गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसके बावजूद दोनों नेताओं की मुलाकात ने पंजाब की चुनावी राजनीति में संभावित नए समीकरणों पर बहस तेज कर दी है।
अगर दोनों दल दोबारा साथ आने का फैसला करते हैं, तो इसका सीधा असर पंजाब के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला और अधिक दिलचस्प होने की संभावना है।
फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की इस अहम मुलाकात के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक नजदीकियां आगे किस दिशा में बढ़ती हैं।