दैनिक खबरनामा। शिमला, 11 जून: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की बैठक में हिमाचल प्रदेश की वित्तीय चुनौतियों को मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य देश को अरबों रुपये मूल्य की पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान कर रहा है, लेकिन इसके अनुरूप आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है।

‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ विषय पर आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश को हुए वित्तीय नुकसान का आकलन करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने मानव विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया, जबकि वर्ष 2026 के स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में हिमाचल ने छठा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में उनकी सरकार के सत्ता संभालने के समय राज्य इस सूचकांक में 21वें स्थान पर था।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात 43 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से 28.4 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी हिमाचल का प्रदर्शन देश के अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है।

राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से बढ़ा आर्थिक दबाव

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति से राज्य की अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लगा है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई 25 हजार करोड़ रुपये की सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये करने की मांग की, ताकि विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान जीएसटी व्यवस्था के कारण पिछले आठ वर्षों में हिमाचल प्रदेश को करीब 25 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।

देश को 90 हजार करोड़ की पर्यावरणीय सेवाएं देता है हिमाचल

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के अध्ययन के अनुसार हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90 हजार करोड़ रुपये मूल्य की पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन इसके बदले राज्य को कोई पर्याप्त आर्थिक प्रतिपूर्ति नहीं मिलती।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 13 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है, फिर भी राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड  से हिमाचल प्रदेश का लगभग 7 हजार करोड़ रुपये का बकाया भी लंबित है।

आपदा राहत राशि जारी करने की भी उठाई मांग

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार का ध्यान हाल के वर्षों में प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदाओं की ओर भी आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि भारी नुकसान झेलने के बावजूद केंद्र द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि अभी तक जारी नहीं की गई है। उन्होंने राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए लंबित वित्तीय सहायता शीघ्र जारी करने की मांग की।

नीति आयोग की इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, नीति आयोग के उपाध्यक्ष एवं सदस्य, मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के.के. पंत भी उपस्थित रहे।

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