दैनिक खबरनामा 25 अप्रैल 2026 पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बार फिर अपना संगठन विस्तार अभियान तेज कर दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) में हालिया बगावत के बाद भाजपा और अधिक आक्रामक नजर आ रही है। पार्टी अब कांग्रेस, शिअद और AAP के असंतुष्ट नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे विरोधी दलों में बेचैनी बढ़ गई है।साल 2022 से पहले भाजपा शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन में रही और तीन बार सरकार का हिस्सा बनी। पिछली बार पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ते हुए रणनीति बदली और कांग्रेस व शिअद में सेंध लगाकर कई बड़े नेताओं को अपने साथ जोड़ा। अब फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इसी रणनीति को दोहराने की तैयारी में है।असंतुष्ट नेताओं पर पैनी नजर पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा लंबे समय से अन्य दलों के नाराज नेताओं पर नजर बनाए रखती है। उनकी राजनीतिक छवि और जनाधार का आकलन करने के बाद ही उन्हें पार्टी में शामिल किया जाता है। एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, भाजपा किसी पर दबाव नहीं बनाती, बल्कि जो नेता अपनी पार्टी से असंतुष्ट होते हैं, वे खुद पार्टी के संपर्क में आते हैं।भाजपा में शामिल होने के लिए एक तय प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें संभावित नेता का साक्षात्कार और उसके राजनीतिक करियर का मूल्यांकन किया जाता है। सभी पहलुओं की जांच के बाद ही सदस्यता दी जाती है। पंजाब भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रितपाल बलियावाल के अनुसार, मौजूदा घटनाक्रम सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में कई बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।पहले भी कई दिग्गज जुड़े 2022 के चुनाव से पहले और उसके बाद भाजपा ने कांग्रेस और शिअद के कई बड़े नेताओं को अपने साथ जोड़ा। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ और पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इसके अलावा कई अन्य नेताओं ने भी भाजपा का दामन थामा।हाल ही में सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने को पार्टी की बड़ी सियासी सफलता माना जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि भाजपा आगामी चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।