दैनिक खबरनामा 25 अप्रैल 2026 चंडीगढ़ के बहुचर्चित रिश्वत मामले में सस्पेंड डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और सह-आरोपी कृष्ण शारदा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विशेष अदालत ने सीबीआई की ओर से दायर प्रारंभिक जांच (पीई) की अर्जी को मंजूरी दे दी है, जिससे एजेंसी को मामले की गहराई से जांच करने का अधिकार मिल गया है।सुनवाई के दौरान केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई। यह रिपोर्ट इस केस में बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि यह उन इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर आधारित है जिन्हें जांच एजेंसी ने जब्त कर फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा था। माना जा रहा है कि इसमें शिकायतकर्ता और कथित बिचौलिए के बीच हुई बातचीत की ऑडियो क्लिप्स का विश्लेषण शामिल है। फॉरेंसिक जांच के जरिए इन क्लिप्स की सत्यता, किसी तरह की एडिटिंग या छेड़छाड़ और आवाज की पहचान की पुष्टि की जाती है। यदि ये बातचीत प्रमाणित होती है, तो यह केस में मजबूत साक्ष्य साबित हो सकती है।
सीबीआई की अर्जी का आरोपियों की ओर से विरोध किया गया। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह अर्जी कानूनी रूप से उचित नहीं है और अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना पर्याप्त आधार के जांच की अनुमति देना आरोपियों के अधिकारों का उल्लंघन होगा। वहीं, सीबीआई ने कहा कि मामले में नए और महत्वपूर्ण सबूत सामने आए हैं, जिनकी विस्तृत जांच जरूरी है।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सीबीआई की अर्जी को स्वीकार कर लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। जांच के दौरान मिले नए तथ्यों के आधार पर पंजाब के कई IAS और IPS अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है, जिसके चलते सीबीआई ने अज्ञात अफसरों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।