दैनिक खबरनामा/ब्यूरो/नई दिल्ली/08 जून 2026. पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में चुनावी प्रतिनिधित्व और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक मोड़ ले चुका है। विभिन्न शहरों और कस्बों में प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के समर्थकों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर टकराव हुआ। हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
क्षेत्रीय प्रशासन का कहना है कि मृतकों में आम नागरिकों के साथ सुरक्षा बलों के कर्मी भी शामिल हैं। वहीं, कई पुलिसकर्मी भी संघर्ष के दौरान घायल हुए हैं। अधिकारियों ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए हैं।
इस बीच, क्षेत्रीय सरकार ने जेएएसी को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है। हालांकि संगठन ने सरकारी कार्रवाई को अस्वीकार करते हुए अपना आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। संगठन ने 9 जून को पूरे क्षेत्र में बंद और हड़ताल का आह्वान किया है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सप्ताहांत के दौरान आंदोलन से जुड़े 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रशासन का आरोप है कि कुछ स्थानों पर सुरक्षा बलों पर हथियारों से हमले किए गए, जबकि आंदोलनकारी पक्ष सरकारी कार्रवाई को दमनात्मक करार दे रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा विवाद का केंद्र क्षेत्रीय विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं। ये सीटें उन परिवारों के लिए निर्धारित हैं जो 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था के माध्यम से क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया जाता है, जबकि सरकार का तर्क है कि इससे विस्थापित समुदायों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
लंबे समय से राजनीतिक अधिकारों, प्रशासनिक सुधारों और अधिक स्वायत्तता की मांग उठाते रहे विभिन्न समूहों ने हालिया घटनाक्रम के बाद अपना विरोध और तेज करने के संकेत दिए हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की है।