दैनिक खबरनामा ब्यूरो। नैरोबी/किन्शासा, 12 जून : अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस का प्रकोप अब विस्थापित लोगों के शिविरों तक पहुंच गया है, जिससे मानवीय संकट और गहरा होने की आशंका बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने पूर्वी कांगो के एक बड़े विस्थापन शिविर में इबोला से पहली मौतों की पुष्टि की है।
यूएनएचसीआर के अनुसार, इतुरी प्रांत के कपांगबा विस्थापन शिविर में रहने वाले दो लोगों की इबोला संक्रमण से मौत हुई है। इस शिविर में लगभग 30,000 आंतरिक रूप से विस्थापित लोग रह रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और राहतकर्मियों ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले शिविरों में यह बीमारी बेहद तेजी से फैल सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 17 मई को इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति घोषित किया था। इसके बाद से वायरस तीन प्रांतों—इतुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु—तक फैल चुका है। दशकों से संघर्ष और हिंसा से प्रभावित इन क्षेत्रों में 50 लाख से अधिक विस्थापित लोग रह रहे हैं।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, कपांगबा शिविर में रहने वाली 60 वर्षीय महिला 30 मई को इबोला संक्रमित पाई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह क्वारंटीन केंद्र से निकल गई थी और बाद में स्वास्थ्यकर्मियों को उसका पता नहीं चल सका। महिला की मौत 31 मई को हुई, जबकि उसकी बेटी की मौत अगले दिन हो गई। बाद में दोनों के शवों की जांच में इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई।
राहतकर्मियों के अनुसार, जब विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य एजेंसियों की टीमें शवों तक पहुंचने की कोशिश कर रही थीं, तब कुछ स्थानीय लोगों ने उनके वाहनों पर पथराव किया। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य एजेंसियों के प्रति अविश्वास इस प्रकोप को नियंत्रित करने में बड़ी बाधा बन रहा है।
कांगो में इबोला के पिछले प्रकोपों के दौरान भी कई समुदायों ने स्वास्थ्य नियमों का पालन करने से इनकार किया था। कई मामलों में संक्रमित शवों को गुप्त रूप से दफनाया गया, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया।
मानवीय संगठनों का कहना है कि विस्थापन शिविरों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कई जगह सैकड़ों लोगों के लिए केवल एक शौचालय उपलब्ध है और खुले में शौच आम बात है। ऐसे माहौल में संक्रमण को रोकना बेहद मुश्किल हो सकता है।
डेनिश रिफ्यूजी काउंसिल की कांगो निदेशक कैटलिन ब्रैडी ने कहा कि यदि इबोला इन शिविरों में फैलता है तो स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि डर के कारण लोग बड़ी संख्या में शिविर छोड़ सकते हैं, जिससे वायरस अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने भी कपांगबा शिविर में संक्रमण के और मामले सामने आने की आशंका जताई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने संक्रमित महिला के संपर्क में आए कई लोगों की पहचान की है और उनकी निगरानी की जा रही है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, कांगो में अब तक इबोला के 676 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 136 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण पड़ोसी देश युगांडा तक भी पहुंच गया है, जहां 19 मामलों की पुष्टि हुई है।
विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस बार इबोला का दुर्लभ “बुंडिबुग्यो” स्ट्रेन फैल रहा है, जिसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा शुरुआती चरण में संक्रमण का पता नहीं चल पाने के कारण बीमारी को नियंत्रित करना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि यदि भीड़भाड़ वाले शिविरों में संक्रमण को तुरंत नहीं रोका गया, तो कांगो एक बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना कर सकता है, जिसका असर पूरे मध्य अफ्रीकी क्षेत्र पर पड़ सकता है।