दैनिक खबरनामा । कठुआ, 24 जून : पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर बहने वाली रावी नदी में बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रावी पर स्थापित सभी 54 बैरीगेट अब पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से संचालित होंगे। नई व्यवस्था के तहत जलस्तर बढ़ने की स्थिति में एक ही कमांड से सभी गेट खोले जा सकेंगे, जिससे नदी के प्रवाह का बेहतर प्रबंधन संभव होगा और लखनपुर क्षेत्र में जलभराव एवं बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सकेगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले वर्ष आई बाढ़ के दौरान बैरीगेट समय पर नहीं खुल पाए थे, जिसके कारण पानी का दबाव बढ़ गया था। इससे लखनपुर क्षेत्र में व्यापक नुकसान हुआ था। बाढ़ का पानी राष्ट्रीय राजमार्ग और रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया था, जबकि रेलवे पुल और सड़क पुल को भी गंभीर क्षति झेलनी पड़ी थी। कई सरकारी भवनों और निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा था।
लखनपुर व्यापार मंडल के प्रधान सन्नी शर्मा ने बताया कि लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ संवाद जारी था। उन्होंने कहा कि अब सभी बैरीगेट को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से जोड़ दिया गया है, जिससे आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई संभव होगी और भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर पंजाब सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। नई प्रणाली न केवल बाढ़ नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि सीमा क्षेत्र के लोगों को सुरक्षा का भरोसा भी देगी। स्थानीय निवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले मानसून सीजन में इससे राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक आधारित यह व्यवस्था नदी प्रबंधन को अधिक सक्षम बनाएगी। इसके माध्यम से जल निकासी की प्रक्रिया तेज होगी और संवेदनशील इलाकों में बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि यह कदम क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, यातायात व्यवस्था और स्थानीय अर्थव्यवस्था की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।