दैनिक खबरनामा
6 जुलाई नई दिल्ली: भारत सरकार रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां अब अमेरिका से एलपीजी आयात को मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना करने की दिशा में तैयारी कर रही हैं। इस पहल का उद्देश्य खाड़ी देशों (मध्य पूर्व) पर निर्भरता कम करना और किसी भी वैश्विक संकट या युद्ध जैसी स्थिति में देश में रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत फिलहाल हर वर्ष अमेरिका से करीब 22 लाख टन (2.2 मिलियन टन) एलपीजी आयात करता है। अब इस मात्रा को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही अल्जीरिया समेत अन्य देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ाने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इस वर्ष पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईरान-इजरायल से जुड़े घटनाक्रम के दौरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले एलपीजी जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। ऐसे समय में अमेरिका ने भारत को लगातार एलपीजी की आपूर्ति जारी रखी और एक विश्वसनीय वैकल्पिक सप्लायर के रूप में उभरकर सामने आया।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 8 फीसदी से भी कम थी। हालांकि नवंबर 2025 में हुए एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद इसमें लगातार वृद्धि दर्ज की गई। जनवरी 2026 में अमेरिकी एलपीजी की हिस्सेदारी बढ़कर 12 फीसदी, फरवरी में 13 फीसदी, मार्च में 37 फीसदी, अप्रैल में 40 फीसदी, मई में 55 फीसदी और जून में रिकॉर्ड 65 फीसदी तक पहुंच गई। इसके अलावा भारत ने आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने के लिए अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया से भी एलपीजी आयात बढ़ाया है, जिससे सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाया जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के लिए सरकार रणनीतिक स्तर पर एलपीजी भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 30 दिनों का ‘स्ट्रेटजिक एलपीजी रिजर्व’ तैयार करने की योजना पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में युद्ध, प्रतिबंध या समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण आयात प्रभावित होता है, तब भी देश में कम से कम एक महीने तक रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी रह सके। यह रणनीतिक भंडार तेल कंपनियों के पास पहले से उपलब्ध 45 दिनों के सामान्य स्टॉक के अतिरिक्त होगा, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।