दैनिक खबरनामा । उधमपुर, 15 जून : वर्षों से पेयजल संकट, जर्जर पाइपलाइनों और लगातार हो रहे जल रिसाव की समस्या से जूझ रहे उधमपुर शहर के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के तहत शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने के लिए करीब 72 करोड़ रुपये की लागत से नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। परियोजना का टेंडर जारी कर दिया गया है और आगामी कुछ सप्ताह में काम शुरू होने की संभावना है।

जलशक्ति विभाग के अनुसार यह परियोजना 124.90 करोड़ रुपये की अमृत 2.0 योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत शहर में दशकों पुरानी और जर्जर हो चुकी पाइपलाइनों को बदलकर नया वितरण नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे जल रिसाव में कमी आएगी और लोगों तक बेहतर ढंग से पेयजल पहुंच सकेगा।

परियोजना में केवल पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार ही नहीं किया जाएगा, बल्कि जल भंडारण और शोधन क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा। इसके अंतर्गत दो लाख गैलन क्षमता का अत्याधुनिक फिल्ट्रेशन प्लांट स्थापित किया जाएगा। साथ ही पांच ओवरहेड सर्विस रिजर्वायर और दो ग्राउंड रिजर्वायर का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और दबाव में सुधार होगा।

वर्तमान में उधमपुर के कई इलाकों में 50 से 60 वर्ष पुरानी पाइपलाइनों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। इन पाइपलाइनों के जर्जर होने के कारण जगह-जगह लीकेज की समस्या बनी रहती है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता है और कई क्षेत्रों में पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो पाती।

प्रतिदिन 16 लाख गैलन पानी की कमी

उधमपुर शहर को वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 38 लाख गैलन पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि वास्तविक मांग करीब 56 लाख गैलन प्रतिदिन है। इस प्रकार शहर को रोजाना लगभग 16 लाख गैलन पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से कई इलाकों में लोगों को नियमित जल संकट झेलना पड़ता है।

अमृत 2.0 योजना के तहत जल भंडारण और शोधन क्षमता में 32 लाख गैलन की अतिरिक्त वृद्धि प्रस्तावित है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद न केवल वर्तमान जल कमी को दूर करने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ती आबादी और बढ़ती मांग के अनुरूप भी पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जा सकेगा।

15 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई योजना

उधमपुर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार को देखते हुए इस परियोजना को भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। विभाग का अनुमान है कि नई व्यवस्था शहर की अगले लगभग 15 वर्षों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगी।

परियोजना के पूरा होने के बाद जल वितरण प्रणाली अधिक आधुनिक, प्रभावी और टिकाऊ बनेगी। साथ ही जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और वर्षों से चली आ रही पेयजल संकट की समस्या में काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

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