ईंधन संकट गहराने की आशंका, रूस डीजल निर्यात पर प्रतिबंध और ईंधन आयात पर कर रहा विचार

दैनिक खबरनामा ब्यूरो। मॉस्को, 24 जून : यूक्रेन के ड्रोन हमलों में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई मॉस्को की प्रमुख तेल रिफाइनरी के इस वर्ष दोबारा शुरू होने की संभावना बेहद कम है। उद्योग से जुड़े दो सूत्रों के अनुसार, रिफाइनरी को हुए भारी नुकसान की मरम्मत में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है, जिससे रूस में ईंधन संकट और गहरा सकता है।

रूसी राजधानी मॉस्को के दक्षिणी बाहरी क्षेत्र में स्थित यह रिफाइनरी मॉस्को क्षेत्र को ईंधन की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाली इकाई है। इस महीने यूक्रेनी ड्रोन ने दो बार इस संयंत्र को निशाना बनाया, जिसके बाद इसका संचालन पूरी तरह रोकना पड़ा।

एक उद्योग सूत्र ने बताया, “रिफाइनरी को हुए नुकसान की मरम्मत में कम से कम आधा वर्ष लगेगा। मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस साल उत्पादन दोबारा शुरू होना मुश्किल दिखाई देता है।”

रूस की तेल शोधन क्षमता पर बढ़ा दबाव

यूक्रेन द्वारा लगातार किए जा रहे ड्रोन हमलों ने रूस की तेल शोधन क्षमता के एक बड़े हिस्से को प्रभावित किया है। इसके चलते देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की कमी देखने को मिल रही है। ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है और कई क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं।

रूस के 11 समय क्षेत्रों में फैले विभिन्न इलाकों में ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने से सरकार पर दबाव बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर रूस भी यूक्रेन के ऊर्जा और रक्षा प्रतिष्ठानों पर मिसाइल हमले जारी रखे हुए है।

मॉस्को रिफाइनरी का उत्पादन था बेहद महत्वपूर्ण

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मॉस्को की इस रिफाइनरी ने वर्ष 2024 में लगभग 1.16 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया था। इस दौरान संयंत्र ने करीब 29 लाख टन पेट्रोल और 32 लाख टन डीजल का उत्पादन किया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी रिफाइनरी के लंबे समय तक बंद रहने से रूस की घरेलू ईंधन आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

डीजल निर्यात रोकने पर विचार

बढ़ते ईंधन संकट के बीच रूस की सरकार कई आपात विकल्पों पर विचार कर रही है। रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने संकेत दिया है कि सरकार डीजल के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही है ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

रूसी अखबार वेदोमोस्ती की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ईंधन की कमी से निपटने के लिए आयात का विकल्प भी तलाश रही है। विशेष रूप से क्रीमिया क्षेत्र में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है, जहां आम जनता को पेट्रोल की बिक्री अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई है।

युद्ध का असर ऊर्जा क्षेत्र पर गहराया

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों देशों द्वारा ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाए जाने से आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। मॉस्को की प्रमुख रिफाइनरी का लंबे समय तक बंद रहना रूस के लिए एक नई चुनौती बन सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश पहले से ही ईंधन आपूर्ति और बढ़ती कीमतों के दबाव का सामना कर रहा है।

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