चंडीगढ़ 5 जनवरी ( जगदीश कुमार)जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग II, यूटी चंडीगढ़ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि रिफंड किए जाने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, तो विक्रेता को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। आयोग ने कहा कि किसी भी तथ्य को साबित करने की जिम्मेदारी उसी पक्ष की होती है, जो उसका दावा करता है, और बिना ठोस दस्तावेजों के केवल मौखिक या सामान्य दलीलें स्वीकार्य नहीं हैं।यह फैसला आयोग के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह सिद्धू और सदस्य बी.एम. शर्मा की पीठ ने सुनाया। आयोग ने विक्रेता के खिलाफ दायर शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि विक्रेता यह साबित करने में विफल रहा कि उपभोक्ता को रिफंड वास्तव में जारी किया गया था।आयोग ने अपने आदेश में कहा कि “सिर्फ यह कह देना कि रिफंड कर दिया गया है, पर्याप्त नहीं है। जब तक इसके समर्थन में ठोस और विश्वसनीय दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत नहीं किए जाते, तब तक ऐसे दावे को सही नहीं माना जा सकता।”आयोग ने यह भी दोहराया कि उपभोक्ता मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है और विक्रेता या सेवा प्रदाता को अपने दावों को प्रमाणित करने के लिए ठोस साक्ष्य पेश करने होते हैं। इस फैसले को उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
You May Also Like
चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला रूट परमिट के आधार पर मोटर क्लेम खारिज करना गलत, बीमा कंपनी को 3.07 लाख चुकाने के आदेश
- Vishal
- February 24, 2026
शादी के लिए तीन दिन की गैरहाज़िरी पर सीआरपीएफ जवान की बर्खास्तगी रद्द, हाईकोर्ट ने कहा अनुशासन के नाम पर अन्याय नहीं
- Vishal
- January 31, 2026
चंडीगढ़ में किसानों का पक्का धरना लाल डोरा और लैंड पूलिंग पॉलिसी पर बढ़ा विवाद
- Vishal
- April 13, 2026
चंडीगढ़ में सैलून संचालक पर तलवारों से हमला, दोनों हाथों की हथेलियां कटीं 10–15 युवकों पर आरोप
- Vishal
- March 6, 2026