चंडीगढ़ 10 फरवरी 2026(दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ में लापता बच्चों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 के बीच कुल 722 बच्चे लापता हुए। यह औसतन हर साल 181 बच्चों के लापता होने के बराबर है, यानी लगभग हर दो दिन में एक बच्चा गायब होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। कई मामलों में डर, सामाजिक बदनामी या देर से शिकायत के कारण वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।हालांकि राहत की बात यह है कि चंडीगढ़ पुलिस ने तेज कार्रवाई करते हुए 722 में से 690 बच्चों को खोजकर सुरक्षित उनके परिवारों से मिला दिया। यह कुल मामलों का 96.5 प्रतिशत से अधिक है। फिलहाल 32 बच्चे अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है।वर्षवार आंकड़ों में लापता बच्चों के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई। 2022 में 155 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 151 को ढूंढ लिया गया। 2023 में 185 में से 181, 2024 में 195 में से 184 तथा 2025 में 187 में से 174 बच्चों को पुलिस ने बरामद किया। हर साल पुलिस की रिकवरी दर 93 प्रतिशत से ऊपर रही, जिससे पुलिस की सक्रियता स्पष्ट होती है।
आंकड़ों के अनुसार किशोर वर्ग सबसे ज्यादा जोखिम में है। लापता बच्चों में सबसे अधिक संख्या 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग की है। इसके बाद 14 से 15 वर्ष के बच्चे शामिल हैं। 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मामले कम हैं।इस मुद्दे पर कानून-व्यवस्था समिति की बैठक में भी चर्चा हुई। सांसद सतनाम सिंह संधू ने संगठित गिरोहों द्वारा बच्चों को भिक्षावृत्ति और शोषण में धकेले जाने की आशंका जताई। यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि हर मामले में सख्त कार्रवाई होगी और लक्ष्य है कि हर लापता बच्चा जल्द से जल्द परिवार तक पहुंचे।