चंडीगढ़ 3 मार्च 2026 ( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ में इस वर्ष श्री चैतन्य महाप्रभु का 540वां जन्मोत्सव एक अद्भुत आध्यात्मिक संयोग के बीच मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वर्ष 1486 में जिस फाल्गुन पूर्णिमा और चंद्रग्रहण के योग में उनका अवतरण हुआ था, वही खगोलीय स्थिति इस बार फिर बनी है। श्रद्धालु इसे अत्यंत दुर्लभ और विशेष अवसर मान रहे हैं।
सेक्टर-36 स्थित इस्कॉन मंदिर चंडीगढ़ में गौर पूर्णिमा के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिर में प्रातः 4:30 बजे मंगला आरती से उत्सव की शुरुआत हुई। इसके बाद नगर कीर्तन, श्रृंगार आरती और गौर कथा का आयोजन किया गया। शाम 5 बजे भजन-संकीर्तन के पश्चात श्री गौर-निताई का पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया जाएगा।मंदिर प्रवक्ता अकिंचन प्रियदास ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु ने कलियुग में हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से प्रेम, करुणा और समानता का संदेश दिया। उनका जीवन मानवता को जोड़ने और भक्ति को सरल बनाने का प्रतीक है। जन्मोत्सव के अवसर पर 108 प्रकार के भोग भगवान को अर्पित किए जाएंगे, जिन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी इस्कॉन से जुड़ी लगभग 80 माताओं ने संभाली है। ग्रहण से पूर्व सभी भोग तैयार कर लिए जाएंगे और ग्रहण काल में मंदिर के कपाट बंद रहेंगे, हालांकि भजन-कीर्तन जारी रहेगा।
सेक्टर-20 स्थित श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में भी संकीर्तन, कथा और प्रसाद वितरण के साथ श्रद्धापूर्वक जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। धार्मिक आस्था और खगोलीय संयोग के इस संगम ने इस वर्ष की गौर पूर्णिमा को ऐतिहासिक बना दिया