दैनिक खबरनामा । मुंबई, 20 जून : महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 अगस्त 2026 के बाद जिन गैर-मराठी चालकों के पास मराठी भाषा दक्षता प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) नहीं होगा, उनके खिलाफ कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन विभाग ने राज्य के सभी गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए 1 जून से 15 अगस्त 2026 के बीच चार घंटे का मराठी संवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करना अनिवार्य किया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य चालकों को मराठी भाषा में सामान्य बातचीत करने योग्य बनाना है, ताकि यात्रियों और चालकों के बीच संवाद संबंधी समस्याओं को दूर किया जा सके।
मराठी भाषा विभाग ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन के लिए कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ को अधिकृत किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल इन संस्थाओं द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्रों को ही मान्यता दी जाएगी।
मुंबई में बनाए गए 71 प्रशिक्षण केंद्र
परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त रवि गायकवाड़ के अनुसार, मुंबई क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए 71 केंद्र स्थापित किए गए हैं। इस अभियान में कोंकण मराठी साहित्य परिषद से जुड़े लगभग 4,500 शिक्षकों को शामिल किया गया है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के अधिकारी भी चालकों को प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
भाषाई बाधाएं दूर करना है उद्देश्य
विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और वाहन चालकों के बीच भाषा संबंधी बाधाओं को समाप्त करना तथा बेहतर संवाद सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा के बाद बिना प्रमाणपत्र पाए जाने वाले गैर-मराठी चालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।