दैनिक खबरनामा । जम्मू, 17 जून : जम्मू में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत का अंदाजा बोन एंड ज्वाइंट (B&J) अस्पताल की स्थिति से लगाया जा सकता है। करीब 40.86 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित और 24 जून 2023 को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा उद्घाटित इस 182-बेड वाले अस्पताल में आज तक एक भी स्थायी पद सृजित नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप अस्पताल महज 32 नर्सिंग कर्मियों के सहारे संचालित हो रहा है।
अस्पताल के लिए वर्ष 2024 में जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता ने विभिन्न श्रेणियों के कुल 299 पद सृजित करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। प्रस्ताव में आर्थोपेडिक्स विभाग के लिए 10 फैकल्टी पद, एनेस्थीसिया के 7 पद तथा रेडियोलॉजी, मेडिसिन और प्लास्टिक सर्जरी के लिए एक-एक पद शामिल थे। इसके अलावा आर्थोपेडिक्स और एनेस्थीसिया में 10-10 रजिस्ट्रार, रेडियोलॉजी में चार तथा ब्लड ट्रांसफ्यूजन सर्विस में एक डिमॉन्स्ट्रेटर पद का भी प्रस्ताव रखा गया था। पैरामेडिकल स्टाफ के 145 पद भी प्रस्तावित किए गए थे।
हालांकि, यह प्रस्ताव अभी तक वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि जल्द ही पदों के सृजन को स्वीकृति मिल जाएगी।
पदों के अभाव में अस्पताल की कार्यप्रणाली गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। वर्तमान में 32 नर्सिंग कर्मियों को चौबीसों घंटे मरीजों की देखभाल करनी पड़ रही है। इनमें 17 जूनियर नर्सें, एक मैट्रन और तीन वरिष्ठ स्टाफ नर्स शामिल हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के आठ कर्मचारी भी सेवाएं दे रहे हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार दोपहर और रात की शिफ्ट में स्टाफ की कमी सबसे अधिक महसूस होती है।
अस्पताल फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के सहारे चल रहा है। यहां का स्टाफ जीएमसी जम्मू, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और श्री महाराजा गुलाब सिंह अस्पताल से प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया गया है। इससे संबंधित अस्पतालों की सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने आधुनिक अस्पताल तो तैयार कर दिए हैं, लेकिन पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध न होने से इन संस्थानों की क्षमता का पूरा लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल में जल्द से जल्द स्थायी पदों का सृजन और नियुक्तियां आवश्यक हैं।