दैनिक खबरनामा । जम्मू, 17 जून : जम्मू-कश्मीर के सभी सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में विभागाध्यक्षों (HOD) के पदों पर जल्द व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के प्राचार्यों को वर्ष 2023 में जारी रोटेशन नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग ने 22 जून 2023 को एक आदेश जारी कर प्रोफेसर रैंक के डॉक्टरों को रोटेशन के आधार पर दो-दो वर्ष के लिए विभागाध्यक्ष नियुक्त करने की व्यवस्था लागू की थी। उस समय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव भूपेंद्र कुमार थे। यह व्यवस्था विश्वविद्यालयों में विभागाध्यक्षों की नियुक्ति की तर्ज पर तैयार की गई थी।
हालांकि, इस नीति का कई मौजूदा विभागाध्यक्षों ने विरोध किया था। जीएमसी जम्मू में बायोकैमिस्ट्री विभाग के तत्कालीन एचओडी डॉ. ए.एस. भाटिया को छोड़कर अधिकांश विभागाध्यक्षों ने पद नहीं छोड़ा था। कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस आदेश को अदालत में भी चुनौती दी, जिसके बाद यह नीति व्यावहारिक रूप से लागू नहीं हो सकी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
अब स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव डॉ. अता-उल-मुनीम ने सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के प्राचार्यों को पत्र भेजकर उक्त आदेश को लागू करने के लिए कहा है। इसके बाद विभिन्न संस्थानों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले सप्ताहों में कई विभागों के एचओडी बदले जा सकते हैं।
वहीं, कई वरिष्ठ चिकित्सक इस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि किसी विभागाध्यक्ष को प्रभावी नेतृत्व और दीर्घकालिक योजनाओं को लागू करने के लिए कम से कम चार वर्ष का कार्यकाल मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि जम्मू विश्वविद्यालय में भी विभागाध्यक्षों का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को दो वर्ष के रोटेशन वाले आदेश पर पुनर्विचार करना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, यदि विभाग अपने निर्देशों पर कायम रहता है तो जम्मू-कश्मीर के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में विभागाध्यक्षों के स्तर पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है।