नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की सबसे विशाल सिंगल-लोकेशन रिफाइनिंग एवं पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं में शामिल जामनगर रिफाइनरी गुजरात के जामनगर जिले में स्थित है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्वामित्व वाला यह विशाल कॉम्प्लेक्स 7,500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है और देश की सबसे बड़ी औद्योगिक इकाइयों में गिना जाता है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनुसार, जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे जटिल सिंगल-साइट रिफाइनरी है। इसकी क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग क्षमता 14 लाख बैरल प्रतिदिन (करीब 22.26 करोड़ लीटर) है, जबकि इसका कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 21.1 है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक माना जाता है।
इस रिफाइनरी की एक बड़ी विशेषता यह है कि यह दुनिया भर में उत्पादित 216 से अधिक विभिन्न ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस कर चुकी है। इतना ही नहीं, यह अत्यंत भारी गुणवत्ता वाले क्रूड ऑयल को भी उच्च गुणवत्ता वाले पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल जैसे उत्पादों में परिवर्तित करने में सक्षम है।
जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स में फ्लूइडाइज्ड कैटेलिटिक क्रैकर (FCC), कोकर, एल्काइलेशन यूनिट, पैराजाइलीन प्लांट, पॉलीप्रोपाइलीन यूनिट, रिफाइनरी ऑफ-गैस क्रैकर (ROGC) और पेटकोक गैसीफिकेशन प्लांट जैसी दुनिया की प्रमुख और अत्याधुनिक इकाइयां स्थापित हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए जामनगर रिफाइनरी और इससे जुड़ा पेट्रोकेमिकल कारोबार सबसे बड़े राजस्व स्रोतों में शामिल है। वर्ष 1999 में शुरू हुई इस परियोजना को महज 30 महीनों के रिकॉर्ड समय में तैयार कर संचालन शुरू कर दिया गया था।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी ने देश में पेट्रोकेमिकल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस परियोजना की नींव रखी थी। इसके निर्माण की जिम्मेदारी मुकेश अंबानी को सौंपी गई थी। उस समय इस परियोजना पर लगभग 3.4 अरब डॉलर (करीब 30,000 करोड़ रुपये) का निवेश किया गया था।
आज जामनगर रिफाइनरी न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि वैश्विक पेट्रोलियम उद्योग में भी अपनी तकनीकी क्षमता और उत्पादन दक्षता के लिए एक अलग पहचान रखती है।