दैनिक खबरनामा। चित्तौड़गढ़, 4 जून 2026: राजस्थान सरकार ने चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नए प्रवेशों पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल है। दस हजार से अधिक छात्रों वाले इस निजी विश्वविद्यालय पर पहले से ही कुछ पाठ्यक्रमों की मान्यता, फर्जी डिग्री प्रकरण और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार द्वारा जांच पूरी होने तक नए दाखिलों पर रोक लगाए जाने से मामला और गंभीर हो गया है।
जांच रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
विश्वविद्यालय के खिलाफ लंबे समय से फर्जी डिग्री जारी करने और अन्य अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसके बाद उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में सामने आई कथित अनियमितताओं के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी अधिनियम-2009 की धारा 44(1) के तहत विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी ओर से जवाब प्रस्तुत कर चुका है, जिसकी फिलहाल विभागीय स्तर पर समीक्षा की जा रही है। जांच प्रक्रिया पूरी होने तक नए प्रवेशों पर रोक प्रभावी रहेगी।
नर्सिंग पाठ्यक्रम को लेकर भी हुआ था विवाद
इसी वर्ष बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों ने आरोप लगाया था कि जिस पाठ्यक्रम में उन्हें प्रवेश दिया गया, उसे राजस्थान नर्सिंग काउंसिल और इंडियन नर्सिंग काउंसिल से आवश्यक मान्यता प्राप्त नहीं थी। इस मुद्दे को लेकर छात्रों ने आंदोलन किया था और मामला पुलिस तक पहुंच गया था। इसके बाद विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर और अधिक सवाल उठने लगे।
एसओजी जांच का दायरा बढ़ा
फर्जी डिग्री मामले में एसओजी द्वारा विश्वविद्यालय के कुछ पूर्व पदाधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और विस्तृत हो गया है। जांच एजेंसियां विभिन्न आरोपों और दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही हैं।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी में विश्वविद्यालय
सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए विश्वविद्यालय के चेयरमैन अशोक गदिया ने कहा है कि संस्थान के खिलाफ अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने निजी स्तर पर कोई गलत कार्य किया है तो उसके लिए पूरे विश्वविद्यालय को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने संकेत दिए हैं कि नए प्रवेशों पर रोक संबंधी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
सरकार और विश्वविद्यालय के बीच जारी इस विवाद का असर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें अब जांच प्रक्रिया और सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।