दैनिक खबरनामा। भोपाल, 7 जून 2026: मध्य प्रदेश में फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टर बनकर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में प्रदेश के विभिन्न जिलों से अब तक नौ ऐसे कथित डॉक्टरों की पहचान हुई है, जिन्होंने संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी।

एनएचएम ने सभी नौ डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस थानों में उनके खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।

दमोह से खुला मामला, पूरे प्रदेश में मची हलचल

फर्जी डॉक्टरों का यह मामला सबसे पहले दमोह जिले में सामने आया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशभर के संजीवनी क्लीनिकों और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात डॉक्टरों के शैक्षणिक दस्तावेजों और पंजीकरण प्रमाणपत्रों की व्यापक जांच शुरू कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, अब तक 81 डॉक्टरों के दस्तावेजों की गहन जांच की जा चुकी है। विभाग का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सभी संदिग्ध मामलों की पड़ताल की जाएगी।

भोपाल में विशेष टीमों की ताबड़तोड़ कार्रवाई

राजधानी भोपाल के संजीवनी क्लीनिकों में भी स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें लगातार दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सरकारी या संविदा स्वास्थ्य केंद्र में बिना वैध डिग्री और पंजीकरण के कोई व्यक्ति चिकित्सा सेवा न दे सके।

10 और डॉक्टर जांच के घेरे में

स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान करीब 10 और डॉक्टरों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं। इनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और रजिस्ट्रेशन नंबरों की सत्यता की जांच की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं तथा फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

संविदा डॉक्टरों की भी होगी दोबारा जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत सभी संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों की भी नए सिरे से जांच कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में किसी भी डॉक्टर के दस्तावेज फर्जी या संदिग्ध पाए जाने पर उसके खिलाफ बर्खास्तगी के साथ-साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

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