
15 जिलों के 30 सरकारी केंद्रों में उपचार के साथ मानसिक और भावनात्मक पुनर्वास पर भी जोर
दैनिक खबरनामा ब्यूरो/चंडीगढ़/08 जून 2026. पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के तहत अब नशा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कला को भी एक प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है। राज्य के 15 जिलों में संचालित 30 सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में आर्ट थेरेपी सत्रों के जरिए मरीजों को मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल में स्केचिंग, पेंटिंग, रंग भरना, हस्तशिल्प निर्माण और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को उपचार प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। चिकित्सा उपचार और परामर्श के साथ इन गतिविधियों को जोड़कर मरीजों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने, तनाव कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की लत से जूझ रहे कई लोग अपनी भावनाओं और मानसिक संघर्षों को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे में आर्ट थेरेपी उनके लिए संवाद और आत्म-अभिव्यक्ति का एक सुरक्षित माध्यम बन रही है। इन सत्रों के दौरान मरीज अपनी यादों, पारिवारिक संबंधों, संघर्षों और भविष्य की उम्मीदों को चित्रों और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से व्यक्त करते हैं।
अमृतसर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज के स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र में कार्यरत परामर्शदाताओं के अनुसार, आर्ट थेरेपी से मरीजों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कई मरीज पहले जहां चिंता, अवसाद और असुरक्षा से घिरे रहते थे, वहीं अब वे अधिक शांत, आत्मविश्वासी और आशावादी नजर आ रहे हैं।
उपचार प्राप्त कर रहे कई लाभार्थियों ने भी इस पहल को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला बताया है। उनका कहना है कि रचनात्मक गतिविधियों में समय बिताने से नशे की तलब और नकारात्मक विचारों से ध्यान हटता है तथा जीवन के प्रति नया दृष्टिकोण विकसित होता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार नशा पीड़ितों के केवल शारीरिक उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक पुनर्वास को भी समान महत्व दे रही है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति का अर्थ केवल नशे से दूरी बनाना नहीं, बल्कि प्रभावित व्यक्तियों को समाज में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित करना और उन्हें नई शुरुआत का अवसर देना भी है।
उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह के दौरान ही 290 से अधिक मरीज इन आर्ट थेरेपी सत्रों का लाभ उठा चुके हैं। सरकार का मानना है कि रचनात्मक गतिविधियां मरीजों में आत्मसम्मान बढ़ाने, भावनात्मक संतुलन स्थापित करने और उन्हें पुनः सामान्य जीवन की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कला आधारित यह उपचार पद्धति नशा मुक्ति अभियान को नई दिशा दे रही है और अनेक मरीजों के लिए उम्मीद तथा आत्मविश्वास का नया माध्यम बनकर उभर रही है। राज्य सरकार की यह पहल नशे के खिलाफ लड़ाई में उपचार और पुनर्वास दोनों मोर्चों पर सकारात्मक परिणाम देने की ओर बढ़ रही है।