दैनिक खबरनामा ब्यूरो। कीव, 12 जून : रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सैन्य तकनीकों को अपने रक्षा ढांचे में शामिल कर रहा है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के एआई केंद्र के प्रमुख डैनिलो त्सवोक का कहना है कि आने वाले वर्षों में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है और दुनिया एक नई तरह की “डिजिटल युद्ध प्रणाली” की ओर बढ़ रही है।

त्सवोक के अनुसार, भविष्य के युद्ध केवल सैनिकों और हथियारों के बीच नहीं, बल्कि उन्नत ऑपरेटिंग सिस्टम और डेटा नेटवर्क के बीच भी लड़े जाएंगे। उनका मानना है कि अगले तीन से पांच वर्षों में युद्धक्षेत्र पर एआई आधारित प्रणालियां निर्णय लेने की प्रक्रिया में इतनी महत्वपूर्ण हो जाएंगी कि वे सैन्य रणनीति का केंद्र बन जाएंगी।

यूक्रेन पहले ही कई सैन्य कार्यों में एआई का उपयोग कर रहा है। ड्रोन संचालन, युद्ध योजनाओं की तैयारी, दुश्मन के मिसाइल हमलों का विश्लेषण और युद्धक्षेत्र से प्राप्त विशाल डेटा की प्रोसेसिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन तकनीक ने लड़ाई के तौर-तरीकों को काफी हद तक बदल दिया है। दोनों पक्ष प्रतिदिन हजारों मानव रहित विमानों का इस्तेमाल निगरानी और हमलों के लिए कर रहे हैं। इसके अलावा यूक्रेन अग्रिम मोर्चे पर सैनिकों की कमी को पूरा करने के लिए रोबोटिक ग्राउंड वाहनों के उपयोग पर भी जोर दे रहा है।

त्सवोक ने कहा कि यूक्रेन का लक्ष्य एक ऐसी एकीकृत डिजिटल प्रणाली विकसित करना है जो युद्धक्षेत्र में मौजूद सैनिकों से लेकर शीर्ष सैन्य कमान तक सभी स्तरों पर निर्णय लेने में सहायता कर सके। यह प्रणाली हजारों किलोमीटर लंबे मोर्चे से प्राप्त सूचनाओं का तुरंत विश्लेषण कर कमांडरों को सुझाव देगी, जिससे सैन्य प्रतिक्रिया का समय काफी कम हो जाएगा।

यूक्रेन के रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव के नेतृत्व में मार्च महीने में स्थापित एआई केंद्र डेटा-आधारित सैन्य निर्णयों को बढ़ावा देने पर काम कर रहा है। सरकार का उद्देश्य हथियार प्रणालियों, निगरानी नेटवर्क और सूचना तंत्र को एकीकृत कर एक ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार करना है जो समन्वित रूप से कार्य कर सके।

युद्ध के दौरान विकसित हो रही इन तकनीकों ने वैश्विक रक्षा कंपनियों और एआई उद्योग का भी ध्यान आकर्षित किया है। कई विदेशी कंपनियां युद्धक्षेत्र से प्राप्त वास्तविक डेटा का उपयोग अपने एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए कर रही हैं। अमेरिकी तकनीकी कंपनी पालेंटियर समेत कई संस्थाएं यूक्रेन को उन्नत डेटा विश्लेषण प्रणाली उपलब्ध करा चुकी हैं।

यूक्रेन ने अपने सहयोगी देशों के साथ युद्ध संबंधी डेटा साझा करने के लिए “ब्रेव-1 डाटारूम” नामक पहल भी शुरू की है। इसका उद्देश्य मित्र देशों को एआई आधारित रक्षा प्रणालियों के परीक्षण और विकास में सहायता देना है।

हालांकि रूस भी अपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं को तेजी से विकसित कर रहा है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूसी सेना ड्रोन और मिसाइल हमलों की योजना बनाने में एआई का उपयोग बढ़ा रही है, जिससे हमलों की तैयारी का समय कम हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में युद्धक्षेत्र पर एआई की भूमिका इतनी बढ़ सकती है कि इंसानों की तुलना में मशीनें अधिक तेजी से निर्णय लेने लगें। ऐसे में सैन्य रणनीतिकारों के सामने यह चुनौती होगी कि वे स्वायत्त प्रणालियों द्वारा सुझाए गए निर्णयों के साथ किस प्रकार तालमेल बनाए रखें।

यूक्रेन का मानना है कि आने वाले दशक में सैन्य शक्ति का निर्धारण केवल हथियारों की संख्या से नहीं, बल्कि डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और निर्णय लेने की गति से होगा। यही कारण है कि आधुनिक युद्ध में एआई को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य तकनीक माना जा रहा है।

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